Music – कभी रेडियो प्रसारण की पहली पसंद बन गया था मोहम्मद रफी का यह गीत…
Music – हिंदी सिनेमा के महान पार्श्वगायक मोहम्मद रफी ने अपने लंबे करियर में अनगिनत यादगार गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी गायकी का प्रभाव ऐसा था कि कई दशक बीत जाने के बाद भी उनके गीत संगीत प्रेमियों की पहली पसंद बने हुए हैं। संगीतकार खय्याम ने एक पुराने इंटरव्यू में रफी के एक ऐसे गीत का जिक्र किया था, जिसे उस दौर में देशभर के विभिन्न रेडियो स्टेशनों पर लगातार प्रसारित किया जाता था।

खय्याम ने साझा किया था दिलचस्प अनुभव
प्रसिद्ध संगीतकार खय्याम ने बताया था कि फिल्म ‘बीवी’ का गीत ‘अकेले में वो घबराते तो होंगे, मिटाके मुझको पछताते तो होंगे’ लोगों के बीच असाधारण रूप से लोकप्रिय हुआ था। उनके अनुसार, यह गीत केवल किसी एक शहर या रेडियो स्टेशन तक सीमित नहीं था, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के प्रसारण केंद्रों से लगातार सुनाई देता रहता था। उनका कहना था कि दिन के किसी भी समय रेडियो चलाने पर संभावना रहती थी कि यह गीत किसी न किसी स्टेशन पर प्रसारित हो रहा हो।
खय्याम ने इस लोकप्रियता को मोहम्मद रफी की आवाज के जादू और गीत की भावनात्मक प्रस्तुति का परिणाम बताया था। उनकी मानें तो रफी ने इस गीत को जिस संवेदनशीलता से गाया, उसी ने इसे श्रोताओं के दिलों तक पहुंचाया।
फिल्म ‘बीवी’ के गीत ने बनाई अलग पहचान
साल 1950 के दशक में रिलीज हुई फिल्म ‘बीवी’ भले ही आज व्यापक चर्चा में नहीं रहती, लेकिन उसका यह गीत संगीत प्रेमियों के बीच अपनी अलग जगह बनाने में सफल रहा। फिल्म का निर्देशन किशोर शर्मा ने किया था, जबकि इसमें अल नासिर, मुमताज शांति और प्राण प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म का संगीत खय्याम ने तैयार किया था और इसी फिल्म का यह गीत समय के साथ उनकी सबसे चर्चित रचनाओं में शामिल हो गया।
जानकारों के अनुसार, इस गीत की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि बाद में गायक महेंद्र कपूर ने भी इसे अपने अंदाज में रिकॉर्ड किया था। हालांकि श्रोताओं के बीच मोहम्मद रफी की मूल प्रस्तुति को ही सबसे अधिक सराहना मिली।
कई दशकों तक कायम रहा रफी का स्वर्णिम दौर
मोहम्मद रफी का नाम हिंदी फिल्म संगीत के सबसे प्रभावशाली गायकों में लिया जाता है। 1940 के दशक से लेकर 1970 के दशक तक उन्होंने सैकड़ों फिल्मों में अपनी आवाज दी और अलग-अलग संगीतकारों के साथ यादगार गीत रिकॉर्ड किए। रोमांटिक, सूफियाना, देशभक्ति, गजल और भावनात्मक गीतों में उनकी पकड़ ने उन्हें हर वर्ग के श्रोताओं का प्रिय बना दिया।
उनकी आवाज में रिकॉर्ड हुए ‘बहारों फूल बरसाओ’, ‘ये दुनिया ये महफिल’ और ‘क्या हुआ तेरा वादा’ जैसे गीत आज भी भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं। फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ के गीत ‘क्या हुआ तेरा वादा’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ फिल्मफेयर सम्मान भी मिला था।
आज भी बरकरार है गीतों की लोकप्रियता
समय बदलने के साथ संगीत सुनने के तरीके जरूर बदल गए हैं, लेकिन मोहम्मद रफी के गीतों की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई। रेडियो के दौर से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक उनकी आवाज लगातार नई पीढ़ी तक पहुंच रही है। संगीत प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि रफी की गायकी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी भावनाओं से भरपूर प्रस्तुति थी, जिसने उनके गीतों को समय की सीमाओं से परे पहुंचा दिया।
इसी वजह से उनके कई गीत आज भी भारतीय फिल्म संगीत के स्वर्णिम अध्याय का अहम हिस्सा माने जाते हैं और संगीत इतिहास में उनका योगदान हमेशा याद किया जाता रहेगा।