Mannat – सुप्रीम कोर्ट से मिली मंजूरी, शाहरुख के घर में जुड़ेंगी दो नई मंजिलें
Mannat – अभिनेता शाहरुख खान के मुंबई स्थित आवास ‘मन्नत’ में दो अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस परियोजना को दी गई तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) मंजूरी के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के पहले दिए गए फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि यदि निर्माण सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए किया जा रहा है, तो उसे रोकने का कोई आधार नहीं बनता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि संबंधित अधिकारियों ने परियोजना की जांच कर यह पाया है कि निर्माण प्रस्ताव निर्धारित नियमों के अनुरूप है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि कोई व्यक्ति अपने निजी आवास में कानून के दायरे में रहकर निर्माण करना चाहता है, तो सामान्य परिस्थितियों में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क भी रखा गया कि मामला एक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता से जुड़ा होने के कारण अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके निर्णय का आधार केवल कानून और उपलब्ध रिकॉर्ड हैं, न कि संबंधित व्यक्ति की पहचान।
किसने दी थी चुनौती
यह याचिका मुंबई के सामाजिक कार्यकर्ता संतोष दौंडकर की ओर से दायर की गई थी। उन्होंने महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (MCZMA) द्वारा 3 जनवरी 2025 को जारी CRZ मंजूरी को चुनौती दी थी। उनका दावा था कि परियोजना का संबंध पहले हुए कथित CRZ उल्लंघनों से है और निर्माण प्रक्रिया में पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं किया गया।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि पुरानी संरचनाओं को आवश्यक मंजूरी के बिना हटाया गया, संपत्ति के उपयोग और श्रेणीकरण को लेकर भी आपत्तियां थीं। इसके अलावा तटीय क्षेत्र पर प्रभाव, भूजल दोहन और पूर्व निर्माण गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
NGT ने भी पहले खारिज की थी याचिका
सुप्रीम कोर्ट से पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण भी इस मामले पर सुनवाई कर चुका था। NGT ने अपने आदेश में कहा था कि प्रस्तुत आरोपों से यह साबित नहीं होता कि नई CRZ मंजूरी नियमों के विरुद्ध जारी की गई है। अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया था कि स्वीकृति केवल मौजूदा छह मंजिला भवन के ऊपर सातवीं और आठवीं मंजिल जोड़ने के लिए दी गई है। इस योजना में जमीन के स्तर पर किसी प्रकार का विस्तार प्रस्तावित नहीं है।
रिकॉर्ड के अनुसार, मुंबई महानगरपालिका ने नवंबर 2024 में भवन योजना को मंजूरी प्रदान की थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस निर्माण परियोजना से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी समाप्त हो गई है।