NEET – सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले गई पुलिस, स्वास्थ्य बिगड़ने पर हुई कार्रवाई
NEET- दिल्ली के जंतर-मंतर पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं के विरोध में लंबे समय से आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह पुलिस ने धरना स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया। अधिकारियों का कहना है कि उनकी लगातार बिगड़ती सेहत, चिकित्सकीय सलाह और न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया।

तड़के की गई पुलिस कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इस कार्रवाई की तैयारी शुक्रवार रात से ही शुरू कर दी थी। जंतर-मंतर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। शनिवार सुबह अधिकांश प्रदर्शनकारियों के आराम करने के दौरान पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर वांगचुक को सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद धरना स्थल पर मौजूद कुछ कार्यकर्ताओं को भी वहां से हटाया गया।
स्वास्थ्य रिपोर्ट बनी प्रमुख वजह
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कई दिनों से चिकित्सकों की टीम लगातार सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही थी। उनकी शारीरिक स्थिति में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी, जिसके चलते वरिष्ठ अधिकारियों ने चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना आवश्यक माना। इसी आधार पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार शुरू किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने जताया विरोध
जैसे ही प्रदर्शनकारियों को इस कार्रवाई की जानकारी मिली, धरना स्थल पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। कई समर्थकों ने पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठाए और नारेबाजी की। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र खाली करने का अनुरोध किया।
पुलिस ने अदालत के आदेश का दिया हवाला
नई दिल्ली जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप की गई। पुलिस के अनुसार, वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई थीं, इसलिए समय रहते उन्हें अस्पताल पहुंचाना आवश्यक समझा गया।
हाईकोर्ट पहले ही जता चुका था चिंता
कुछ दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया था कि उनकी प्रतिदिन चिकित्सकीय जांच कराई जाए और यदि आवश्यक हो तो तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि किसी भी नागरिक के जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रशासन को इस दिशा में हर संभव कदम उठाने चाहिए।
डॉक्टरों ने बताया था मेडिकल इमरजेंसी
शुक्रवार को जांच करने वाले चिकित्सकों ने वांगचुक की स्थिति को गंभीर बताया था। डॉक्टरों के अनुसार, लगभग 20 दिनों तक भोजन न करने के कारण उनका वजन नौ किलोग्राम से अधिक घट चुका था। शरीर में ऊर्जा के प्रमुख स्रोत लगभग समाप्त हो चुके थे और मांसपेशियों पर भी असर दिखाई देने लगा था। चिकित्सकों ने चेतावनी दी थी कि यदि अनशन जारी रहा तो शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं, जिससे जान का खतरा बढ़ सकता है।
आगे की रणनीति पर समर्थक कायम
अस्पताल में भर्ती किए जाने के बावजूद वांगचुक के समर्थकों और उनसे जुड़े छात्र संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका दावा है कि 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘संसद चलो’ कार्यक्रम को लेकर उनकी योजना में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम आगे भी उठाए जाएंगे।