राष्ट्रीय

ChildLabour – जिले में विशेष अभियान के तहत तीन बाल श्रमिकों को कराया गया मुक्त

ChildLabour- जिले को बाल श्रम से मुक्त बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने 31 अगस्त तक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम लगातार निरीक्षण कर रही है। जिला प्रशासन के अनुसार, हाल ही में की गई कार्रवाई में तीन बाल श्रमिकों को काम से मुक्त कराया गया है। साथ ही जिन प्रतिष्ठानों में ये बच्चे कार्यरत पाए गए, उनके संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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टास्क फोर्स की निगरानी में चल रही कार्रवाई

प्रशासन ने बताया कि जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स अभियान की निगरानी कर रही है। यह टीम अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर रही है ताकि बाल श्रम से जुड़े मामलों की पहचान कर समय पर कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल कानून लागू करना ही नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराना भी है।

जागरूकता पर भी दिया जा रहा जोर

श्रम प्रवर्तन अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि निरीक्षण के साथ-साथ व्यापारियों, उद्योग संचालकों और आम नागरिकों को भी जागरूक किया जा रहा है। उनसे अपील की जा रही है कि किसी भी बच्चे से श्रम न कराया जाए और यदि कहीं बाल श्रम की जानकारी मिले तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।

बच्चों को शिक्षा और योजनाओं से जोड़ने का प्रयास

प्रशासन के अनुसार, मुक्त कराए गए बच्चों को दोबारा श्रम में जाने से रोकने के लिए उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। साथ ही उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि परिवारों को कौशल विकास और अन्य सहायता योजनाओं से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

कानून का पालन करने की अपील

श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना कानूनन प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों को किसी भी जोखिमपूर्ण या खतरनाक कार्य में नियोजित नहीं किया जा सकता। विभाग ने दुकानदारों, फैक्ट्री संचालकों और अन्य प्रतिष्ठान मालिकों से श्रम कानूनों का पूरी तरह पालन करने की अपील की है।

उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान

अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रम निषेध कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है। दोषी पाए जाने पर छह माह से दो वर्ष तक की सजा, 20 हजार रुपये से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति दोबारा इस तरह के अपराध में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने कहा कि अभियान के दौरान निरीक्षण और जागरूकता कार्यक्रम लगातार जारी रहेंगे।

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