JDUCase – जदयू नेता हत्याकांड में पूर्व विधायक सहित तीन आरोपियों को मिली राहत
JDUCase- बिहार के गया जिले में वर्ष 2013 में हुए जदयू नेता सुमिरक यादव हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। एमपी/एमएलए कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पूर्व विधायक रणजीत यादव, उनके भाई विवेक यादव और साले दीपू यादव को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत के इस निर्णय के बाद लंबे समय से लंबित इस मामले में तीनों आरोपियों को राहत मिली है। इसी प्रकरण में पूर्व विधायक कुंती देवी को पहले ही अदालत दोषी ठहरा चुकी है।

वर्ष 2013 में हुई थी घटना
यह मामला 26 फरवरी 2013 की शाम का है। शिकायत के अनुसार, जदयू नेता सुमिरक यादव पार्टी के प्रखंड कार्यालय से एक सहयोगी के साथ अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान उन पर हमला किया गया, जिसमें उनकी मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए थे। घटना के बाद मृतक के भाई की शिकायत पर नीमचक बथानी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।
चुनावी रंजिश का लगाया गया था आरोप
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि घटना के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की पृष्ठभूमि थी। शिकायत के अनुसार, चुनावी विवाद को लेकर हमला किए जाने का आरोप लगाया गया था। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की और आरोपपत्र अदालत में प्रस्तुत किया। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनाया।
अदालत में चली विस्तृत सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 13 गवाहों के बयान पेश किए। वहीं बचाव पक्ष ने भी अपने साक्ष्य और दलीलें प्रस्तुत कीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद अदालत ने रणजीत यादव, विवेक यादव और दीपू यादव को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर बरी करने का आदेश दिया।
एक आरोपी को पहले ही मिल चुकी है सजा
इसी हत्याकांड से जुड़े मामले में पूर्व विधायक कुंती देवी के खिलाफ अदालत पहले ही फैसला सुना चुकी है। उनके संबंध में न्यायालय द्वारा पूर्व में दोषसिद्धि और सजा का आदेश दिया जा चुका है। वर्तमान फैसला केवल उन तीन आरोपियों से संबंधित है, जिनके विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य साबित नहीं हो सके।
फैसले के बाद मामले की हुई चर्चा
अदालत के निर्णय के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आपराधिक मामलों में अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और जांच रिकॉर्ड के आधार पर ही निर्णय देती है। इस मामले में भी न्यायालय ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों का मूल्यांकन करने के बाद अपना फैसला सुनाया।