SupremeCourt – वायुसेना कर्मियों की नौकरी छोड़ने पर अदालत ने स्पष्ट किया नियम
SupremeCourt- उच्चतम न्यायालय ने भारतीय वायुसेना के कर्मियों की सेवा छोड़कर असैन्य पदों पर जाने से जुड़े नियमों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि वायुसेना के किसी कर्मी को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी समय सेवा छोड़ने का अधिकार नहीं है। न्यायालय के अनुसार, इस प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और सक्षम अधिकारियों की पूर्व अनुमति का पालन करना अनिवार्य है, क्योंकि यह सशस्त्र बलों की कार्यक्षमता और अनुशासन से जुड़ा विषय है।

पूर्व अनुमति को बताया अनिवार्य प्रक्रिया
न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि वायुसेना में लागू प्रक्रियाएं केवल औपचारिकता नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी एयरमैन को असैन्य पद के लिए आवेदन करने से पहले संबंधित अधिकारी की अनुमति लेना और चयन होने के बाद अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य है। इन नियमों का उद्देश्य वायुसेना की परिचालन क्षमता और आवश्यक मानव संसाधन को बनाए रखना है।
अनुशासित बलों के लिए अलग हैं नियम
फैसले में अदालत ने कहा कि भारतीय वायुसेना एक अनुशासित सैन्य बल है और इसके सदस्यों पर सामान्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में अलग सेवा नियम लागू होते हैं। न्यायालय ने कहा कि समय से पहले सेवा छोड़ने की अनुमति का निर्णय केवल व्यक्तिगत इच्छा के आधार पर नहीं लिया जा सकता। इसके लिए संगठन की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।
सहायक प्रोफेसर पद से जुड़ा था मामला
यह मामला भारतीय वायुसेना के कॉरपोरल नखत सिंह से संबंधित था। उन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित चयन प्रक्रिया में सहायक प्रोफेसर (हिंदी) पद के लिए सफलता प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने वायुसेना से एनओसी जारी करने और सेवा से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया, ताकि वह नई नियुक्ति ग्रहण कर सकें।
आवेदन प्रक्रिया में नियमों का बना मुद्दा
रिकॉर्ड के अनुसार, नखत सिंह ने वर्ष 2020 में असैन्य पद के लिए आवेदन किया था। हालांकि, वायुसेना अधिकारियों ने वर्ष 2017 के लागू आदेश का हवाला देते हुए उनका अनुरोध स्वीकार नहीं किया। संबंधित आदेश के अनुसार, किसी भी एयरमैन को असैन्य पद के लिए आवेदन करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होता है। चूंकि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था, इसलिए एनओसी और सेवा से मुक्त करने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया।
पहले भी नहीं मिली थी राहत
एयर ऑफिसर कमांडिंग के निर्णय को चुनौती देते हुए नखत सिंह ने पहले सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। दोनों संस्थानों ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली।
अदालत ने बरकरार रखा पूर्व निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निचली संस्थाओं के फैसलों को सही माना और याचिका खारिज कर दी। अदालत ने दोहराया कि वायुसेना के सेवा नियमों का पालन प्रत्येक कर्मी के लिए अनिवार्य है और इन्हें व्यक्तिगत सुविधा के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारी बनाए रखने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है।