झारखण्ड

PayCommission – 8वें वेतन आयोग की बैठकों के बाद वेतन वृद्धि पर बढ़ीं कर्मचारियों की उम्मीदें

PayCommission – केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार कर रहा 8वां वेतन आयोग लगातार अलग-अलग राज्यों में हितधारकों के साथ चर्चा कर रहा है। हाल ही में आयोग ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता और ओडिशा के भुवनेश्वर में बैठकें आयोजित कीं, जिनमें वेतन संरचना, वार्षिक वेतन वृद्धि, भत्तों और पेंशन से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। अब आयोग की अगली बैठकें अगस्त और सितंबर के दौरान दिल्ली, चेन्नई और पुडुचेरी में प्रस्तावित हैं।

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कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर हुआ विचार

बैठकों के दौरान कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगियों के प्रतिनिधियों ने कई अहम सुझाव आयोग के समक्ष रखे। इनमें Fitment Factor, Annual Increment, विभिन्न भत्तों में संशोधन और पेंशन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषय प्रमुख रहे। आयोग इन सुझावों का अध्ययन कर रहा है ताकि भविष्य की सिफारिशों में कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों की आवश्यकताओं को उचित स्थान दिया जा सके।

3 प्रतिशत से अधिक Annual Increment की मांग

वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को मूल वेतन पर लगभग 3 प्रतिशत की वार्षिक वेतन वृद्धि मिलती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई को देखते हुए इस वृद्धि को 5 से 7 प्रतिशत के बीच किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों के मूल वेतन में लंबे समय तक बेहतर वृद्धि होगी, जिसका लाभ भविष्य में लागू होने वाले Fitment Factor पर भी दिखाई देगा।

5 प्रतिशत वृद्धि का संभावित प्रभाव

यदि आयोग भविष्य में Annual Increment को 5 प्रतिशत करने की सिफारिश करता है और सरकार इसे स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों के मूल वेतन में मौजूदा व्यवस्था की तुलना में अधिक बढ़ोतरी हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, Level-1 के एक कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन ₹18,000 प्रति माह माना जाए तो वर्तमान 3 प्रतिशत वृद्धि के आधार पर पांच वर्षों में यह लगभग ₹20,900 तक पहुंच सकता है। वहीं 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि लागू होने की स्थिति में यही मूल वेतन करीब ₹24,200 प्रति माह तक पहुंचने का अनुमान है। इस तरह पांच वर्षों में लगभग ₹3,300 का अतिरिक्त अंतर देखने को मिल सकता है।

मूल वेतन बढ़ने से अन्य लाभों पर भी असर

विशेषज्ञों का मानना है कि मूल वेतन में वृद्धि का असर केवल मासिक सैलरी तक सीमित नहीं रहता। इससे Dearness Allowance (DA), House Rent Allowance (HRA), National Pension System (NPS) में योगदान और सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले लाभ भी प्रभावित होते हैं। इसलिए Annual Increment में संभावित बढ़ोतरी को कर्मचारी दीर्घकालिक आर्थिक लाभ के रूप में देख रहे हैं।

आयोग की समयसीमा और आगे की प्रक्रिया

8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था और इसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि के अनुसार अगस्त की शुरुआत तक आयोग अपनी समयसीमा का आधा चरण पूरा कर लेगा। फिलहाल Annual Increment या अन्य वेतन संबंधी बदलावों पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अंतिम सिफारिशें रिपोर्ट के रूप में सरकार को सौंपी जाएंगी, जिसके बाद केंद्र सरकार उन पर विचार कर अंतिम फैसला लेगी।

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