Property – उत्तर प्रदेश में सर्किल रेट तय करने की प्रक्रिया में होगा बड़ा बदलाव
Property– उत्तर प्रदेश सरकार राज्यभर में जमीन और मकानों के सर्किल रेट निर्धारित करने की प्रक्रिया को एक समान बनाने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद सभी 75 जिलों में सर्किल रेट और स्टांप शुल्क की गणना एक तय मानक के आधार पर की जाएगी। स्टांप, न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से संपत्ति खरीदने और बेचने वाले लोगों के लिए प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी होगी।

अलग-अलग जिलों की व्यवस्था होगी समाप्त
फिलहाल प्रदेश के प्रत्येक जिले में सर्किल रेट तय करने का तरीका अलग-अलग है। जिला प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार दरें निर्धारित करता है, जिससे एक जिले की गणना प्रणाली दूसरे जिले से भिन्न होती है। वाराणसी, लखनऊ, आगरा, मथुरा और प्रयागराज जैसे शहरों में भौगोलिक स्थिति और रियल एस्टेट बाजार की प्रकृति अलग होने के कारण मूल्यांकन के तरीके भी अलग-अलग अपनाए जाते हैं। नई नीति का उद्देश्य इस असमानता को समाप्त करना है।
एक समान गाइडलाइन के आधार पर होगी गणना
प्रस्ताव के अनुसार, राज्य सरकार सभी जिलाधिकारियों को एक समान दिशा-निर्देश उपलब्ध कराएगी। इसी गाइडलाइन के आधार पर सर्किल रेट का निर्धारण और स्टांप शुल्क की गणना की जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे विभिन्न जिलों में अपनाई जा रही अलग-अलग प्रक्रियाओं के कारण उत्पन्न होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों में कमी आएगी और आम नागरिकों को स्पष्ट व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
तीन श्रेणियों में होगा संपत्तियों का वर्गीकरण
नई व्यवस्था के तहत प्रदेश की संपत्तियों को मुख्य रूप से शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण श्रेणियों में विभाजित करने का प्रस्ताव है। प्रत्येक श्रेणी में क्षेत्र के विकास स्तर, सड़क संपर्क, बुनियादी सुविधाओं और व्यावसायिक महत्व जैसे मानकों के आधार पर अधिकतम 25 प्रकार के सर्किल रेट तय किए जा सकेंगे। इसके अलावा आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और कृषि भूमि के लिए अलग-अलग मानक दरें निर्धारित करने की भी योजना है।
सर्किल रेट का क्या होता है महत्व
सर्किल रेट वह न्यूनतम मूल्य होता है, जिसके आधार पर किसी संपत्ति का पंजीकरण किया जाता है। यदि बाजार मूल्य सर्किल रेट से अधिक है, तो स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क उसी अधिक मूल्य के आधार पर लिया जाता है। सरकार का मानना है कि एक समान प्रणाली लागू होने से संपत्ति के मूल्यांकन और शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनेगी।
सरकार ने बताई प्रस्ताव की मंशा
राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य पूरे प्रदेश में सर्किल रेट निर्धारण की प्रक्रिया को मानकीकृत करना है। उनका कहना है कि इससे विभिन्न जिलों में मौजूद प्रक्रियागत विसंगतियां दूर होंगी और खरीदार तथा विक्रेता दोनों आसानी से किसी भी संपत्ति का सर्किल रेट और स्टांप शुल्क समझ सकेंगे। प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।