Dabar – USFDA की चेतावनी के बाद सिलवासा प्लांट पर बढ़ी निगरानी
Dabar- एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) की ओर से एक अहम नियामकीय चेतावनी मिली है। एजेंसी ने कंपनी के सिलवासा स्थित दवा निर्माण संयंत्र में Current Good Manufacturing Practices (CGMP) से जुड़े कई गंभीर उल्लंघनों का उल्लेख करते हुए चेतावनी पत्र जारी किया है। इस कार्रवाई के बाद कंपनी की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और उत्पादन प्रक्रियाएं चर्चा में आ गई हैं।

CEO को भेजा गया विस्तृत नोटिस
USFDA ने कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहित मल्होत्रा को भेजे पत्र में निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़ी कई कमियों की ओर ध्यान दिलाया है। नियामक के अनुसार, निरीक्षण के दौरान डेटा की विश्वसनीयता, गुणवत्ता निगरानी और उत्पादन नियंत्रण से जुड़े मानकों का पर्याप्त पालन नहीं पाया गया। एजेंसी का कहना है कि इन कमियों के कारण संबंधित संयंत्र में तैयार किए गए उत्पाद अमेरिकी नियमों के तहत निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरते।
रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं पर उठे सवाल
निरीक्षण रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के उपकरण उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। USFDA ने दस्तावेजों के रखरखाव और उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी का मानना है कि इन मुद्दों का समाधान केवल सीमित सुधारों से संभव नहीं होगा और इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रणालीगत बदलाव आवश्यक हैं।
कंपनी के जवाब पर एजेंसी असंतुष्ट
डाबर इंडिया ने अपनी ओर से कर्मचारियों के पुनः प्रशिक्षण, दस्तावेजीकरण में सुधार और सफाई सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करने जैसे कदम उठाने की जानकारी दी थी। हालांकि USFDA ने कहा कि कंपनी का जवाब मौजूदा कमियों को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। नियामक के अनुसार, गुणवत्ता नियंत्रण और डेटा इंटीग्रिटी से जुड़े मूलभूत मुद्दों पर और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
15 कार्य दिवस में मांगा गया जवाब
USFDA ने जानकारी दी है कि 5 जून 2026 से सिलवासा संयंत्र में निर्मित औषधीय उत्पादों को Import Alert 66-40 के दायरे में रखा गया है। इसके साथ ही कंपनी को 15 कार्य दिवस के भीतर विस्तृत सुधारात्मक कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। एजेंसी ने यह भी कहा है कि एक स्वतंत्र CGMP विशेषज्ञ से संयंत्र का व्यापक ऑडिट कराया जाए और उसकी रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई जाए।
भारत में भी नियामकीय कार्रवाई
डाबर इंडिया हाल ही में भारत में भी नियामकीय जांच के दायरे में आई थी। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कंपनी के कुछ खाद्य उत्पादों पर किए गए “100 प्रतिशत” दावों को भ्रामक मानते हुए उन्हें हटाने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, गाय के घी, नारियल पानी सहित कई उत्पादों पर लागू किया गया है।
कंपनी ने क्या कहा
डाबर इंडिया ने कहा है कि वह USFDA और FSSAI से जुड़े मामलों में आवश्यक प्रक्रिया का पालन कर रही है। कंपनी के अनुसार, FSSAI के निर्देशों के अनुरूप संबंधित उत्पादों के लेबल, विज्ञापनों और वेबसाइट से “100 प्रतिशत” दावा हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। साथ ही कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि वह आगे की कार्रवाई के संबंध में कानूनी सलाह ले रही है।