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Delhi Air Pollution: दिल्ली का दम घुट रहा! रोहिणी-वज़ीरपुर में गंभीर के करीब पहुंचा AQI, सांसों पर गहराया संकट

Delhi Air Pollution: दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता का स्तर एक बार फिर चिंता का विषय बना हुआ है। पूरे शहर में हवा की सघनता और दृश्यता का स्तर कम हो गया है, जिसका मुख्य कारण ‘ज़हरीले स्मॉग’ की चादर है जिसने कई प्रमुख स्थानों को अपनी चपेट में ले लिया है। इस गंभीर स्थिति के चलते, अधिकांश निगरानी स्टेशनों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी के बीच दर्ज किया गया है। यह वायु प्रदूषण न केवल दृश्यता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि लाखों निवासियों के सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।

Delhi Air Pollution
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राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण का उच्चतम स्तर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण का स्तर खतरनाक ढंग से बढ़ गया है। सुबह 7 बजे के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों में AQI 350 के निशान को पार कर गया है। एक Monitoring data के मुताबिक, बवाना जैसे इलाकों में यह सूचकांक 382 तक पहुंच गया है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी के उच्चतम छोर पर है और ‘गंभीर’ होने से बस कुछ ही कदम दूर है। इसी तरह, रोहिणी में 380, वज़ीरपुर में 377 और मुंडका में 371 का AQI दर्ज किया गया है। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि इन क्षेत्रों में हवा में हानिकारक कणों की सांद्रता अत्यंत उच्च स्तर पर है।

प्रदूषण का यह फैलाव राजधानी के लगभग सभी कोनों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। एक व्यापक Geographical analysis दर्शाती है कि शहर के केंद्रीय और बाहरी दोनों ही हिस्से बुरी तरह प्रभावित हैं। उदाहरण के लिए, आनंद विहार (363), अशोक विहार (361), डीटीयू (367), और जहांगीरपुरी (367) में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक है। घनी आबादी वाले चांदनी चौक और पंजाबी बाग जैसे इलाकों में भी क्रमशः 345 और 368 का AQI दर्ज किया गया है। यह इंगित करता है कि प्रदूषण के स्रोत केवल औद्योगिक नहीं हैं, बल्कि ये वाहन उत्सर्जन और निर्माण गतिविधियों जैसे अन्य कारकों से भी जुड़े हुए हैं जो पूरे शहर में व्याप्त हैं।

स्वास्थ्य पर स्मॉग का गहरा प्रभाव

इस जहरीले स्मॉग का सबसे बड़ा शिकार सार्वजनिक स्वास्थ्य है। AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) के आसपास के क्षेत्रों में भी AQI 348 दर्ज किया गया है, जो बताता है कि यहां आने वाले मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी प्रदूषित हवा का सामना करना पड़ रहा है। ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी का प्रदूषण विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में Public health advisory जारी करना और लोगों को मास्क पहनने तथा अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह देना अनिवार्य हो जाता है।

कम प्रदूषित और उच्च प्रदूषित क्षेत्रों का तुलनात्मक अध्ययन

हालांकि अधिकांश दिल्ली की हवा (Delhi Air Pollution) ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है, कुछ क्षेत्रों में तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति दर्ज की गई है। उदाहरण के लिए, आईजीआई एयरपोर्ट टी3 इलाके में AQI 298 दर्ज किया गया है, जो ‘खराब’ श्रेणी के ऊपरी हिस्से में है, लेकिन 300 के निशान से नीचे है। लोधी रोड पर भी यह 300 दर्ज किया गया है, जो कि शहर के अन्य हॉटस्पॉट जैसे रोहिणी (380) और वज़ीरपुर (377) से काफी बेहतर है। यह Environmental comparison बताता है कि स्थानीय मौसम की स्थिति और प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों को नियंत्रित करके आंशिक सुधार संभव है।

वायु गुणवत्ता सूचकांक के मानक की समझ

वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) हवा की गुणवत्ता को मापने का एक सरल तरीका है, जिसे जनता आसानी से समझ सकती है। Standardized measurement के तहत, 0-50 को ‘अच्छा’, 51-100 को ‘संतोषजनक’, 101-200 को ‘मध्यम प्रदूषित’, 201-300 को ‘खराब’, 301-400 को ‘बहुत खराब’, और 401-500 को ‘गंभीर’ माना जाता है। दिल्ली के अधिकांश क्षेत्र वर्तमान में 300 से ऊपर हैं, जो बताता है कि प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने पर श्वसन रोग होने की आशंका बहुत अधिक है।

प्रदूषण को नियंत्रित करने की तात्कालिक आवश्यकता

दिल्ली के इस भयावह वायु गुणवत्ता संकट को देखते हुए, Urgent intervention की आवश्यकता है। निर्माण गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाना, ट्रकों के प्रवेश को सीमित करना और पराली जलाने पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना जैसे उपाय तुरंत लागू किए जाने चाहिए। इसके अतिरिक्त, जनता को भी व्यक्तिगत स्तर पर जागरूक होने और सामूहिक परिवहन (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) का उपयोग करने की आवश्यकता है। दीर्घकालिक Sustainable solution के लिए, सरकार को शहर के भीतर हरित आवरण बढ़ाने और औद्योगिक उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम बनाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह के स्वास्थ्य आपातकाल से बचा जा सके।

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