बिहार

AnandMohan – समयपूर्व रिहाई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

AnandMohan- बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की समयपूर्व रिहाई से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला बिहार सरकार द्वारा जेल नियमों में संशोधन के बाद आनंद मोहन को रिहा किए जाने से जुड़ा है। इस निर्णय को गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया और उनकी बेटी ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

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सुनवाई के दौरान अदालत की अहम टिप्पणी

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता, बिहार सरकार, आनंद मोहन और राज्य सजा माफी बोर्ड की ओर से रखे गए पक्षों को विस्तार से सुना। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सवाल उठाया कि ड्यूटी के दौरान कार्यरत एक सरकारी अधिकारी की हत्या को अत्यंत गंभीर श्रेणी का मामला क्यों नहीं माना गया। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों को लेकर न्यायिक दृष्टिकोण का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

रिहाई के फैसले पर उठे थे सवाल

आनंद मोहन को वर्ष 2023 में बिहार सरकार की ओर से जेल नियमों में संशोधन किए जाने के बाद रिहा किया गया था। इस संशोधन के तहत ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी की हत्या के दोषियों की समयपूर्व रिहाई पर लागू प्रतिबंध हटाया गया था। इसके बाद आनंद मोहन सहित कुछ अन्य दोषियों को भी रिहाई का लाभ मिला। इस निर्णय पर उस समय राजनीतिक और कानूनी स्तर पर व्यापक चर्चा हुई थी।

ट्रायल कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का मामला

जी. कृष्णैया हत्या मामले में मुजफ्फरपुर की ट्रायल कोर्ट ने 5 अक्टूबर 2007 को आनंद मोहन को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। बाद में पटना हाईकोर्ट ने वर्ष 2008 में इस सजा को बदलकर आजीवन कारावास कर दिया। जुलाई 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। इसके बाद आनंद मोहन ने लंबी अवधि तक कारावास की सजा काटी।

2023 में जेल से हुई थी रिहाई

करीब 16 वर्ष जेल में रहने के बाद आनंद मोहन को 27 अप्रैल 2023 को सहरसा मंडल कारा से रिहा किया गया। उनकी रिहाई बिहार सरकार के संशोधित जेल नियमों के आधार पर हुई थी। इस फैसले के बाद मृतक अधिकारी के परिवार ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और रिहाई आदेश को निरस्त करने की मांग की।

1994 की घटना से जुड़ा है पूरा मामला

यह मामला वर्ष 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या से संबंधित है। मुजफ्फरपुर जिले में एक शवयात्रा के दौरान भीड़ ने उनकी गाड़ी रोककर हमला किया था, जिसमें उनकी जान चली गई थी। जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद इस मामले में आनंद मोहन को दोषी ठहराया गया था। यह प्रकरण लंबे समय से बिहार के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है।

फैसले पर टिकी सभी पक्षों की नजर

सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद अब सभी पक्ष अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। अदालत का फैसला इस बात पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है कि गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए कैदियों की समयपूर्व रिहाई से जुड़े नियमों की व्याख्या भविष्य में किस प्रकार की जाएगी।

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