CAG – बिहार में बिना उपयोग वाले पुलों पर करोड़ों खर्च, रिपोर्ट में उजागर हुईं कई अनियमितताएं
CAG- बिहार विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट में ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी चंपारण और अररिया जिले में ऐसे पुलों के निर्माण पर करीब 3.30 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, जिनका आज तक उपयोग शुरू नहीं हो सका। मुख्य वजह यह रही कि पुल बनने के बाद भी उनसे जुड़ने वाले संपर्क मार्ग तैयार नहीं हो पाए, जिससे पूरी परियोजना अधूरी रह गई।

संपर्क मार्ग नहीं बनने से पुल बने बेकार
रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वी चंपारण के बेतौना गांव में एक पुल का निर्माण वर्ष 2018 में पूरा कर लिया गया था। योजना के तहत पुल के दोनों ओर संपर्क सड़क बनाई जानी थी, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण आवश्यक था। हालांकि स्थानीय स्तर पर विरोध के कारण जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी और सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया। नतीजतन, कई वर्ष बीत जाने के बावजूद पुल आम लोगों के उपयोग में नहीं आ सका।
अररिया में भी सामने आई समान स्थिति
सीएजी ने अररिया जिले के जोकीहाट प्रखंड स्थित थापकोल गांव की एक परियोजना का भी उल्लेख किया है। यहां पुल का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया और दोनों ओर सीमित लंबाई में संपर्क मार्ग भी बनाया गया। लेकिन आगे की सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा नहीं होने से यह परियोजना भी अधूरी रह गई। रिपोर्ट के मुताबिक निर्माण पूरा होने के वर्षों बाद भी पुल का उपयोग शुरू नहीं हो पाया है। विभाग ने इस मामले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जानकारी दी है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
महालेखा परीक्षक ने दोनों मामलों में परियोजना शुरू करने से पहले आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं होने को प्रशासनिक चूक माना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रकार की परियोजनाओं में पहले जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक था, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। पूर्वी चंपारण मामले में संबंधित विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, जबकि अररिया के मामले में आगे कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
तटबंध परियोजनाओं में भी बड़ा वित्तीय नुकसान
रिपोर्ट में बागमती-अधवारा, कमला-बलान और महानंदा नदी से जुड़ी बाढ़ प्रबंधन योजनाओं का भी उल्लेख किया गया है। सीएजी के अनुसार पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराए बिना ही तटबंध निर्माण के लिए निविदाएं जारी कर दी गईं। बाद में जमीन संबंधी बाधाओं के कारण कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं, जिससे लगभग 247.80 करोड़ रुपये का सार्वजनिक धन प्रभावित हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्षों बाद भी इन परियोजनाओं का अपेक्षित लाभ लोगों तक नहीं पहुंच सका।
नल जल योजना पर भी उठे सवाल
सीएजी रिपोर्ट में हर घर नल का जल योजना से जुड़े कुछ क्षेत्रों की स्थिति का भी जिक्र किया गया है। जांच के दौरान जिन वार्डों का परीक्षण किया गया, वहां कई स्थानों पर लोगों को आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी मिलने की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार इन इलाकों में जल शोधन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से करीब 1.17 लाख लोगों पर इसका असर पड़ा। विभाग ने भविष्य में ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की बात कही है।