MLCElection – बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर तेज हुई राजनीतिक हलचल
MLCElection – बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव और उपचुनाव की घोषणा के बाद राज्य की सियासत में गतिविधियां बढ़ गई हैं। इनमें नौ सीटों पर नियमित चुनाव होंगे, जबकि एक सीट पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के कारण खाली हुई है। चुनावी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही जनता दल यूनाइटेड और एनडीए के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

निशांत कुमार को लेकर बढ़ी अटकलें
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार फिलहाल विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें आगामी विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सकता है। जेडीयू सूत्रों के अनुसार पार्टी उन्हें उन सीटों में से किसी एक पर मौका दे सकती है, जिनका कार्यकाल अगले छह वर्षों तक रहेगा।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट की बजाय किसी अन्य सीट से निशांत को सदन भेजने पर विचार कर रही है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
जेडीयू में टिकट को लेकर मंथन
विधान परिषद चुनाव को लेकर जेडीयू के भीतर उम्मीदवारों के चयन पर विचार-विमर्श जारी है। पार्टी के कुछ अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। इनमें ललन मंडल और भीष्म सहनी जैसे नेताओं का नाम शामिल है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जेडीयू इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन कर सकती है। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सहमति के बाद ही लिया जाएगा।
विधानसभा संख्या बल से एनडीए मजबूत
विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए एनडीए की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। 10 सीटों में से नौ पर सत्ताधारी गठबंधन की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि विपक्षी महागठबंधन को एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
विधानसभा में एनडीए के पास 200 से अधिक विधायकों का समर्थन है। ऐसे में चुनावी गणित पूरी तरह गठबंधन के पक्ष में दिखाई दे रहा है। एक विधान परिषद सीट जीतने के लिए करीब 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है।
सहयोगी दलों को भी मिल सकता है मौका
भाजपा और जेडीयू के अलावा एनडीए के अन्य सहयोगी दलों को भी इस चुनाव में प्रतिनिधित्व मिल सकता है। चर्चा है कि एक सीट उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा को दी जा सकती है। इस सीट से मंत्री दीपक प्रकाश को उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
दीपक प्रकाश भी फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं और संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें निर्धारित समय के भीतर विधायक या एमएलसी बनना आवश्यक है।
भाजपा में नए चेहरों पर विचार
भाजपा अपने हिस्से की सीटों पर नए नेताओं को मौका देने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी चल रही है कि कुछ पुराने चेहरों की जगह नए सामाजिक समीकरणों के आधार पर उम्मीदवार तय किए जा सकते हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि भाजपा नेता संजय मयूख को आगामी विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो विधान परिषद में उनकी सीट पर किसी नए नेता को अवसर मिल सकता है।
जून में होगी मतदान प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग ने विधान परिषद चुनाव की अधिसूचना जारी करने की तारीख 1 जून तय की है। नामांकन प्रक्रिया 8 जून तक चलेगी और मतदान 18 जून को कराया जाएगा। इसी दिन पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर भी उपचुनाव होगा।
अब सभी दलों की नजर उम्मीदवारों की अंतिम सूची और राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और हलचल बढ़ने की संभावना है।