Basmati Export – खाड़ी क्षेत्र में बाधाओं से चावल कारोबार पर दबाव
Basmati Export – पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। दुनिया में बासमती चावल के सबसे बड़े निर्यातक देशों में शामिल भारत को खाड़ी क्षेत्र के बाजारों तक माल पहुंचाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ईरान, सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों में भारतीय बासमती चावल की बड़ी मांग रहती है, लेकिन हालिया परिस्थितियों के कारण निर्यात गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।

अप्रैल में निर्यात आंकड़ों में दर्ज हुई कमी
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में भारत से लगभग 4.74 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ। एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 6.47 लाख टन था। इस तरह सालाना आधार पर बासमती चावल के निर्यात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। निर्यातकों का कहना है कि प्रमुख आयातक देशों तक आपूर्ति प्रभावित होने से व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।
घरेलू बाजार में कीमतों पर भी असर
निर्यात में आई सुस्ती का प्रभाव घरेलू बाजार में भी देखा जा रहा है। व्यापार से जुड़े सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ सप्ताह में बासमती चावल की खुदरा कीमतों में नरमी आई है। जहां पहले बाजार में कीमतें अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर थीं, वहीं अब कई स्थानों पर इनमें गिरावट दर्ज की गई है। मांग और आपूर्ति के संतुलन में बदलाव को इसकी एक प्रमुख वजह माना जा रहा है।
बढ़ी परिवहन और बीमा लागत
निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम के कारण शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त शुल्क वसूल रही हैं। कुछ महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों से गुजरने वाले जहाजों पर बीमा लागत भी बढ़ गई है। इससे निर्यातकों के लिए कुल लागत में वृद्धि हुई है और नए सौदों को अंतिम रूप देना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
कुछ बाजारों में अधिक असर
उद्योग संगठनों का कहना है कि ईरान और अफगानिस्तान जैसे बाजारों में निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। कई मामलों में माल की ढुलाई में देरी की खबरें सामने आई हैं। जहाजों की आवाजाही धीमी होने और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा है। इससे निर्यातकों और कारोबारियों दोनों की चिंता बढ़ी हुई है।
गैर-बासमती चावल ने दी राहत
हालांकि बासमती चावल के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन कुल चावल निर्यात के मोर्चे पर तस्वीर कुछ बेहतर रही। अप्रैल 2026 के दौरान गैर-बासमती चावल की मांग में वृद्धि देखी गई, जिससे कुल निर्यात आंकड़ों को सहारा मिला। अफ्रीका के कई देशों और बांग्लादेश से बढ़ी मांग के कारण इस श्रेणी का निर्यात मजबूत बना रहा।
किसानों के लिए क्या मायने हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बासमती की कीमतों में नरमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर किसानों की फसल चयन रणनीति पर पड़ सकता है। आगामी खरीफ सीजन में कुछ किसान बासमती धान के बजाय अन्य फसलों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे भविष्य में उत्पादन और निर्यात दोनों प्रभावित होने की संभावना बन सकती है।
आगे की स्थिति पर नजर
कृषि और व्यापार क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि बासमती निर्यात का भविष्य काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और समुद्री व्यापार मार्गों की स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि प्रमुख निर्यात बाजारों तक आपूर्ति सामान्य होती है, तो कारोबार में सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल उद्योग जगत की नजर पश्चिम एशिया के हालात और वैश्विक शिपिंग व्यवस्था पर बनी हुई है।