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Exploration – गहरे समुद्र में तेल-गैस खोज बढ़ाने को सरकार तैयार कर रही बड़ा प्रोत्साहन पैकेज

Exploration- भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर दीर्घकालिक रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। इसी दिशा में केंद्र सरकार गहरे समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को नई रफ्तार देने की तैयारी में है। इसके लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय लगभग 80,000 करोड़ रुपये के विशेष प्रोत्साहन पैकेज पर काम कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक कंपनियों को भारत के डीपवॉटर क्षेत्रों में निवेश के लिए आकर्षित करना है।

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‘समुद्र मंथन’ मिशन के तहत नई पहल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह प्रस्तावित योजना National Deepwater Exploration Mission, जिसे ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम के नाम से भी जाना जा रहा है, का अहम हिस्सा है। सरकार का मानना है कि अब तक लागू नीतियों से अपेक्षित विदेशी निवेश नहीं मिल पाया। इसी वजह से इस बार केवल नीतिगत सुधारों तक सीमित रहने के बजाय खोज कार्य की लागत में भी प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता देने की तैयारी की जा रही है। इससे गहरे समुद्र में अन्वेषण से जुड़े आर्थिक जोखिम को काफी हद तक कम करने का प्रयास होगा।

ड्रिलिंग लागत में मिल सकती है सरकारी सहायता

प्रस्ताव के मुताबिक डीपवॉटर क्षेत्रों में खोजी कुओं की ड्रिलिंग पर आने वाले खर्च का 50 प्रतिशत तक सरकार वापस कर सकती है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी विभिन्न मंत्रालयों के बीच विचाराधीन है और अंतिम मंजूरी से पहले इसमें बदलाव संभव है। प्रत्येक कुएं के लिए सहायता की अधिकतम सीमा तय किए जाने पर भी विचार चल रहा है, ताकि परियोजनाओं की लागत नियंत्रित रह सके। इसके अलावा 3D भूकंपीय सर्वेक्षणों के लिए भी आंशिक वित्तीय सहयोग दिए जाने की संभावना जताई गई है।

डीपवॉटर ब्लॉकों की नीलामी पर भी फोकस

सरकार Open Acreage Licensing Programme के तहत 18 डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 17 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। उम्मीद की जा रही है कि तब तक प्रस्तावित प्रोत्साहन पैकेज को अंतिम रूप मिल जाएगा, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़े और नीलामी में अधिक भागीदारी देखने को मिले।

इतनी महंगी क्यों होती है समुद्री खोज

गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। भूवैज्ञानिक परिस्थितियों के कारण एक डीपवॉटर खोजी कुएं की ड्रिलिंग पर करीब 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है। अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में यह लागत इससे भी अधिक होती है। यही वजह है कि अब तक कई विदेशी कंपनियां निवेश से दूरी बनाए रखती रही हैं या शुरुआती सर्वेक्षण के बाद परियोजनाओं से पीछे हट जाती थीं।

सरकारी और निजी कंपनियों को मिलेगा लाभ

प्रस्तावित योजना का लाभ सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को मिलने की संभावना है। इस बीच ओएनजीसी ने ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम के तहत अपना पहला डीपवॉटर खोजी कुआं खोदने का कार्य शुरू कर दिया है। इसे देश के अपतटीय ऊर्जा अन्वेषण अभियान में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जोखिम कम करने पर सरकार का जोर

मौजूदा व्यवस्था में कंपनियों को ब्लॉक मिलने के बाद भूकंपीय सर्वेक्षण और खोजी कुओं सहित न्यूनतम कार्य कार्यक्रम पूरा करना होता है। यदि शुरुआती आंकड़ों में व्यावसायिक उत्पादन की संभावना कम दिखाई देती है, तो कई कंपनियां भारी निवेश से बचने के लिए ब्लॉक वापस कर देती हैं। नई योजना के जरिए सरकार इसी जोखिम को कम करना चाहती है। साथ ही ऑफशोर 2D भूकंपीय डेटा के संग्रह और पुराने भूवैज्ञानिक आंकड़ों को आधुनिक तकनीक से दोबारा प्रोसेस करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि निवेशकों को अधिक विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।

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