ITR Filing – रिटर्न जमा करने से पहले इन जरूरी बातों की करें पुष्टि, बच सकते हैं बड़ी परेशानियों
ITR Filing- यदि आपने अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो जल्दबाजी में फॉर्म भरने के बजाय पहले सभी जरूरी जानकारियों का मिलान कर लेना बेहतर रहेगा। छोटी-सी चूक भी टैक्स रिफंड में देरी, रिटर्न की प्रोसेसिंग रुकने या आयकर विभाग की ओर से स्पष्टीकरण मांगने जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। इसलिए रिटर्न जमा करने से पहले प्रत्येक जानकारी को ध्यानपूर्वक जांचना जरूरी माना जाता है।

व्यक्तिगत जानकारी का मिलान सबसे पहले करें
रिटर्न भरते समय सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि पैन, आधार, नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जैसी व्यक्तिगत जानकारियां सही दर्ज हैं। यदि रिफंड मिलने की संभावना है तो जिस बैंक खाते में राशि प्राप्त करनी है, वह प्री-वैलिडेटेड होना चाहिए। इसके साथ बैंक खाता संख्या और IFSC Code जैसी जानकारियों में भी किसी प्रकार की त्रुटि नहीं होनी चाहिए।
सही ITR Form का चयन जरूरी
हर करदाता के लिए एक ही रिटर्न फॉर्म लागू नहीं होता। आपकी आय का स्रोत तय करता है कि कौन-सा ITR Form आपके लिए उपयुक्त है। यदि गलती से गलत फॉर्म भर दिया जाता है, तो रिटर्न को डिफेक्टिव माना जा सकता है और दोबारा प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। इसलिए फॉर्म चुनने से पहले अपनी आय की प्रकृति को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
सभी आय के स्रोतों का करें खुलासा
रिटर्न में केवल वेतन की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। बचत खाते का ब्याज, Fixed Deposit से आय, Dividend, किराये की आमदनी, पेंशन, Freelancing या Consultancy से हुई कमाई, शेयर और Mutual Fund से प्राप्त लाभ, संपत्ति की बिक्री से हुआ Capital Gain तथा Virtual Digital Assets से संबंधित आय भी नियमानुसार दर्ज की जानी चाहिए। किसी आय को छिपाने पर भविष्य में विभागीय कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
कटौतियां और टैक्स देनदारी की जांच करें
यदि आपने पुराने या नए Tax Regime के तहत उपलब्ध टैक्स छूट का विकल्प चुना है, तो पात्र Deduction सही तरीके से दर्ज करें। इसमें Health Insurance Premium, अतिरिक्त NPS योगदान, Home Loan Interest और पात्र दान जैसी कटौतियां शामिल हो सकती हैं। यदि टैक्स की गणना के बाद कोई राशि देय निकलती है, तो Self Assessment Tax जमा करने के बाद उसकी चालान जानकारी भी रिटर्न में सही दर्ज करें।
निवेश और विदेशी परिसंपत्तियों की जानकारी न छोड़ें
वित्तीय वर्ष के दौरान यदि आपने शेयर, Mutual Fund, प्रॉपर्टी या अन्य किसी निवेश को बेचकर लाभ कमाया है, तो उसका सही Capital Gain Calculation करना जरूरी है। इसी तरह जिन करदाताओं के पास विदेश में बैंक खाता, निवेश या विदेशी स्रोत से आय है, उन्हें उसकी जानकारी भी रिटर्न में देनी चाहिए। नियमों के अनुसार ऐसी जानकारी छिपाने पर आर्थिक दंड या अन्य कार्रवाई हो सकती है।
अंतिम समीक्षा और ई-वेरिफिकेशन अनिवार्य
रिटर्न सबमिट करने से पहले कुल आय, टैक्स, कटौतियों और संभावित रिफंड की राशि का एक बार फिर मिलान कर लें। साथ ही AIS और Form 26AS में उपलब्ध विवरण का भी रिटर्न से मिलान करना उपयोगी माना जाता है। सभी जानकारियां सही होने के बाद आधार OTP, Net Banking या उपलब्ध अन्य माध्यम से E-Verification जरूर पूरा करें। ई-वेरिफिकेशन के बिना रिटर्न को अंतिम रूप से दाखिल माना नहीं जाता।
विशेषज्ञों ने किन गलतियों से बचने की दी सलाह
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, गलत ITR Form चुनना, AIS और Form 26AS का मिलान न करना, ब्याज या Dividend जैसी आय का उल्लेख छोड़ देना, Capital Gain की गलत गणना, बैंक विवरण में त्रुटि या E-Verification पूरा न करना ऐसी सामान्य गलतियां हैं, जिनकी वजह से रिटर्न की प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है। समय लेकर सभी जानकारियों की दोबारा जांच करना इन समस्याओं से बचने का सबसे आसान तरीका माना जाता है।