Tariff – अमेरिका ने कई व्यापारिक साझेदारों पर लागू किए नए आयात शुल्क
Tariff- अमेरिका ने अपने कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर नए शुल्क लागू करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत विभिन्न देशों से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार ये शुल्क न्यूयॉर्क समयानुसार शुक्रवार रात 12:01 बजे से प्रभावी हो गए हैं। हालांकि, इस समय से पहले जहाजों पर भेजे जा चुके माल पर नई दरें लागू नहीं होंगी। भारत और पाकिस्तान भी उन देशों में शामिल हैं, जिन पर यह नई व्यवस्था लागू की गई है।

जांच के बाद लिया गया निर्णय
अमेरिकी प्रशासन ने बताया कि यह कदम एक व्यापक जांच के निष्कर्षों के आधार पर उठाया गया है। जांच में करीब 60 अर्थव्यवस्थाओं की आपूर्ति श्रृंखला का आकलन किया गया था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि कई देश जबरन श्रम से जुड़े मामलों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा पाए। इसी आधार पर अमेरिका ने अलग-अलग देशों के लिए नई टैरिफ दरें निर्धारित की हैं। प्रशासन का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य वैश्विक व्यापार में पारदर्शिता बढ़ाना और श्रमिक अधिकारों से जुड़े मानकों को मजबूत करना है।
किन देशों पर कितना शुल्क
अमेरिका ने भारत, पाकिस्तान, कनाडा, ब्रिटेन, मेक्सिको और बांग्लादेश सहित कुछ व्यापारिक साझेदारों से आने वाले आयात पर 10 प्रतिशत शुल्क तय किया है। वहीं जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के उत्पादों पर न्यूनतम 12.5 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। यूरोपीय संघ और ताइवान से आयातित वस्तुओं पर शुल्क 10 प्रतिशत से अधिक नहीं रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि कुछ मामलों में संबंधित व्यापार समझौतों और अन्य नियमों के आधार पर अतिरिक्त शुल्क भी लागू हो सकते हैं।
भारत को प्रस्तावित दर से राहत
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक प्रस्ताव में भारत के लिए 12.5 प्रतिशत टैरिफ का सुझाव था, लेकिन अंतिम निर्णय में इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। प्रशासन ने पिछले महीने ही इस दिशा में संकेत दिए थे, जब जबरन श्रम से जुड़ी जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की गई थी। भारत ने पहले इन आरोपों से असहमति जताई है और अपने व्यापारिक मानकों का बचाव किया है।
कुछ उत्पादों को रखा गया बाहर
नई टैरिफ व्यवस्था के दायरे से कई जरूरी वस्तुओं को बाहर रखा गया है। इनमें ईंधन, खाद्य सामग्री और उर्वरक शामिल हैं। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, धातु और दवा जैसे उत्पाद, जिन पर पहले से अलग उद्योग-विशिष्ट शुल्क लागू हैं, उन्हें भी इस नई व्यवस्था से छूट दी गई है। उत्तर अमेरिकी व्यापार समझौते के तहत आने वाले मेक्सिको और कनाडा के कुछ उत्पादों को भी इस सूची में शामिल नहीं किया गया है।
आगे भी बदल सकती है व्यापार नीति
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी प्रशासन की शुल्क नीति आने वाले समय में भी बदल सकती है। उनका कहना है कि वैश्विक व्यापार को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है और वर्ष के दौरान नई घोषणाएं सामने आ सकती हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने यह प्रस्ताव 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत की गई जांच के आधार पर तैयार किया था। प्रशासन का कहना है कि जबरन श्रम से जुड़े मामलों के खिलाफ अमेरिका लंबे समय से सख्त नीति अपनाता रहा है और भविष्य में भी इसी दिशा में कदम जारी रहेंगे।