UPI Charges – ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर शुल्क को लेकर PCI ने दी सफाई
UPI Charges – यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई के इस्तेमाल पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के बीच पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने स्थिति स्पष्ट की है। संगठन का कहना है कि आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई भुगतान पहले की तरह बिना किसी शुल्क के जारी रहेगा। पीसीआई के मुताबिक, चर्चा का केंद्र उपभोक्ताओं से पैसा लेना नहीं, बल्कि देश के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान ढांचे को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनाए रखना है।

ग्राहकों से लेनदेन शुल्क लेने की योजना नहीं
पीसीआई ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए यूपीआई शुल्क से जुड़े सवालों का जवाब दिया। संगठन के अनुसार, वर्ष 2016 में यूपीआई की शुरुआत के समय से ही ग्राहकों से सीधे कोई लेनदेन शुल्क नहीं लिया जाता है। आगे भी उपभोक्ताओं को यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने के लिए अलग से शुल्क नहीं देना होगा।
पीसीआई ने छोटे दुकानदारों और किराना कारोबारियों को लेकर भी स्थिति साफ की। उसके मुताबिक, यूपीआई भुगतान स्वीकार करने वाले छोटे व्यापारियों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वसूलने की व्यवस्था नहीं है। संगठन ने कहा कि यूपीआई की शुरुआत ही डिजिटल भुगतान को आम लोगों और छोटे कारोबारियों तक आसान तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से हुई थी, इसलिए इस वर्ग की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
बड़े कारोबारियों पर शुल्क की चर्चा अलग
पीसीआई के मुताबिक, डिजिटल भुगतान नेटवर्क को संचालित करने में तकनीकी ढांचे, साइबर सुरक्षा, ग्राहक सहायता और नियामकीय जरूरतों पर लगातार खर्च होता है। अभी इन गतिविधियों से जुड़े खर्च का बड़ा हिस्सा बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता उठाते हैं। यूपीआई पर लेनदेन की संख्या लगातार बढ़ने के साथ इस पूरे ढांचे में आगे भी निवेश की जरूरत बनी रहेगी।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में बड़े व्यापारियों पर किसी तरह का मर्चेंट सर्विस चार्ज लागू किया जाता है, तो इसका सीधा अर्थ उपभोक्ताओं से यूपीआई इस्तेमाल करने का शुल्क लेना नहीं होगा। ऐसा शुल्क व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाता के बीच व्यावसायिक व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है। पीसीआई ने बताया कि कई देशों में डिजिटल भुगतान से जुड़ी ऐसी व्यावसायिक व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं।
यूपीआई के बुनियादी ढांचे पर लगातार निवेश जरूरी
पीसीआई का कहना है कि यूपीआई अब भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है और हर महीने अरबों लेनदेन इस नेटवर्क के जरिए होते हैं। इतने बड़े स्तर पर भुगतान व्यवस्था को लगातार चालू रखने के लिए तकनीक के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम, ग्राहक सहायता और नए समाधान विकसित करने पर भी खर्च करना पड़ता है।
पिछले करीब एक दशक में बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता, फिनटेक कंपनियां, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार काम करते रहे हैं। इसी बुनियादी ढांचे के कारण यूपीआई चौबीसों घंटे भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराता है।
छोटे कारोबारियों को लेकर पीसीआई का रुख स्पष्ट
पीसीआई ने अपने स्पष्टीकरण में दोबारा जोर दिया कि यूपीआई की लागत और भविष्य की स्थिरता पर होने वाली चर्चा को आम ग्राहकों या छोटे व्यापारियों पर सीधे शुल्क लगाने से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। संगठन के अनुसार, लक्ष्य ऐसा भुगतान नेटवर्क तैयार रखना है जो बढ़ते लेनदेन के बीच भी सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद बना रहे।
इसलिए फिलहाल आम उपयोगकर्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त रहने की बात स्पष्ट की गई है। वहीं, बड़े व्यापारियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच संभावित शुल्क व्यवस्था को अलग व्यावसायिक विषय के तौर पर देखा जा रहा है। यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब बहस इस बात पर केंद्रित है कि इसके संचालन और सुरक्षा के लिए जरूरी निवेश का टिकाऊ मॉडल कैसे तैयार किया जाए।