BewafaSanam – 30 साल बाद भी दिलों में जिंदा हैं इस फिल्म के सदाबहार गीत
BewafaSanam- वर्ष 1995 में रिलीज हुई फिल्म ‘बेवफा सनम’ भले ही अपनी कहानी से ज्यादा चर्चा में न रही हो, लेकिन इसके गीतों ने संगीत प्रेमियों के दिलों में ऐसी जगह बनाई जो आज भी कायम है। टी-सीरीज से जुड़ी इस फिल्म में कृष्णा कुमार और शिल्पा शिरोडकर मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म के कई दर्दभरे गीत उस दौर में बेहद लोकप्रिय हुए और आज भी पुराने संगीत के शौकीनों की पसंद बने हुए हैं। दिल टूटने की भावना को बेहद सरल और प्रभावशाली शब्दों में पिरोने वाले इन गीतों के पीछे एक ऐसे गीतकार की कलम थी, जिनके कई सदाबहार गीत आज भी याद किए जाते हैं।

दर्द भरे गीतों ने दिलाई अलग पहचान
‘वफा ना रास आई तुझे ओ हरजाई’, ‘ओ दिल तोड़ के हंसती हो मेरा’, ‘ये धोखे प्यार के धोखे’ और ‘अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का’ जैसे गीत रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गए थे। इन गीतों की लोकप्रियता केवल उस समय तक सीमित नहीं रही, बल्कि तीन दशक बाद भी इन्हें बड़ी संख्या में सुना जाता है। प्रेम, बिछड़ने और भावनात्मक दर्द को जिस सहजता से इन गीतों में व्यक्त किया गया, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
योगेश की कलम से निकले थे यादगार बोल
बहुत कम लोग जानते हैं कि इन चर्चित गीतों के बोल प्रसिद्ध गीतकार योगेश ने लिखे थे। योगेश वही रचनाकार थे जिन्होंने हिंदी सिनेमा को ‘रिमझिम गिरे सावन’, ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’ और ‘जिंदगी कैसी है पहेली’ जैसे कालजयी गीत दिए। उनकी लेखनी की खासियत यह थी कि वे साधारण शब्दों में गहरी भावनाओं को व्यक्त कर देते थे। यही वजह रही कि ‘बेवफा सनम’ के गीत भी श्रोताओं के दिलों तक सीधे पहुंचे।
संगीत और गायकी ने बढ़ाया असर
फिल्म में कुल नौ गीत शामिल थे। इनमें से छह गीतों का संगीत निखिल-विनय की जोड़ी ने तैयार किया, जबकि बाकी गीतों को अमर उत्पल, मिलिंद सागर और राजू सिंह ने संगीतबद्ध किया। हालांकि सबसे अधिक लोकप्रियता योगेश के लिखे और निखिल-विनय के संगीत से सजे गीतों को मिली। इन गानों को सोनू निगम, उदित नारायण, नितिन मुकेश और पूर्णिमा जैसे गायकों ने अपनी आवाज दी, जिसने इनकी भावनात्मक गहराई को और प्रभावशाली बना दिया।
सीमित पहचान, लेकिन अमर रचनाएं
योगेश को अपने लंबे फिल्मी सफर में उतनी व्यावसायिक पहचान नहीं मिल सकी, जितनी उनके समकालीन कई अन्य गीतकारों को मिली। इसके बावजूद उन्होंने हिंदी सिनेमा को ऐसे गीत दिए, जो समय की कसौटी पर आज भी खरे उतरते हैं। राजेश खन्ना की चर्चित फिल्म ‘आनंद’ के कई यादगार गीत भी योगेश की ही रचनाएं थे। उनकी लेखनी में जीवन, प्रेम, बिछड़ने और उम्मीद जैसे भाव बेहद सहज रूप में सामने आते थे।
गीतों के जरिए आज भी जीवित है विरासत
साल 2020 में योगेश का निधन हो गया, लेकिन उनके लिखे गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं। ‘बेवफा सनम’ के गीतों ने यह साबित किया कि अच्छे बोल और मधुर संगीत समय की सीमाओं से परे होते हैं। यही वजह है कि तीन दशक बाद भी इन गीतों को नई पीढ़ी सुन रही है और पुराने श्रोता आज भी इन्हें अपनी पसंदीदा प्लेलिस्ट में शामिल रखते हैं।