Bollywood – अस्पताल के बिस्तर पर सुना था अपना आखिरी गीत, भावुक कर देती है यह कहानी…
Bollywood – हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर से जुड़ी कई ऐसी कहानियां हैं, जो समय बीतने के बाद भी लोगों को भावुक कर देती हैं। ऐसी ही एक यादगार घटना फिल्म ‘मिली’ के मशहूर गीत ‘बड़ी सूनी सूनी है जिंदगी’ से जुड़ी है। यह गीत सिर्फ अपनी भावपूर्ण धुन और बोलों के लिए ही नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी परिस्थितियों की वजह से भी खास माना जाता है। संगीतकार सचिन देव बर्मन ने इस गीत को अपने जीवन के अंतिम दिनों में तैयार किया था।

गीत की तैयारी के दौरान बिगड़ी तबीयत
साल 1975 में रिलीज हुई फिल्म ‘मिली’ के लिए सचिन देव बर्मन संगीत तैयार कर रहे थे। बताया जाता है कि गीत ‘बड़ी सूनी सूनी है जिंदगी’ की रिहर्सल उनके घर पर चल रही थी और किशोर कुमार भी इसकी तैयारी में जुटे थे। इसी दौरान सचिन देव बर्मन की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें पैरालिसिस का अटैक आया। परिवार और साथियों ने तुरंत अस्पताल चलने की सलाह दी, लेकिन वह रिकॉर्डिंग पूरी होने तक इलाज टालना चाहते थे क्योंकि यह गीत उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था।
किशोर कुमार की बात मानकर पहुंचे अस्पताल
मीडिया में प्रचलित किस्सों के अनुसार, जब सचिन देव बर्मन अस्पताल जाने को तैयार नहीं हुए तो किशोर कुमार ने उन्हें समझाने का अलग तरीका अपनाया। उन्होंने कहा कि उनका गला ठीक नहीं है और रिकॉर्डिंग एक दिन बाद करना बेहतर रहेगा। यह सुनकर सचिन देव बर्मन इलाज के लिए अस्पताल जाने को राजी हो गए। अगले दिन स्टूडियो में रिकॉर्डिंग निर्धारित समय पर हुई, लेकिन इस बार संगीतकार स्वयं वहां मौजूद नहीं थे।
रिकॉर्डिंग के बाद अस्पताल में सुनाया गया गीत
संगीतकार की गैरमौजूदगी में किशोर कुमार ने पूरे भाव के साथ इस गीत को रिकॉर्ड किया। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान उनकी आवाज में व्यक्तिगत भावनाएं भी साफ महसूस हो रही थीं। बाद में रिकॉर्ड किया गया गीत अस्पताल में सचिन देव बर्मन को सुनाया गया। इसे सुनने के बाद उन्होंने संतोष जताया और बताया कि किशोर कुमार ने गीत को ठीक उसी भावना के साथ गाया है, जैसा वह चाहते थे।
यादगार बन गया यह गीत
‘बड़ी सूनी सूनी है जिंदगी’ बाद में हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित भावपूर्ण गीतों में शामिल हो गया। यह गीत फिल्म ‘मिली’ की कहानी के साथ गहराई से जुड़ा रहा और श्रोताओं के बीच आज भी लोकप्रिय है। उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, अस्पताल में यह गीत सुनने के कुछ समय बाद सचिन देव बर्मन की तबीयत और बिगड़ गई तथा वह दोबारा स्वस्थ होकर अपने काम पर वापस नहीं लौट सके। उनकी संगीत यात्रा का यह अध्याय आज भी भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास की सबसे भावुक घटनाओं में गिना जाता है।