Dhurandhar Box Office Success: क्या अक्षय खन्ना ने छीन ली रणवीर सिंह की चमक, ‘धुरंधर’ के सेट से निकले गहरे राज…
Dhurandhar Box Office Success: भारतीय सिनेमा के पर्दे पर जब ‘धुरंधर’ की दहाड़ गूंजी, तो मानों वक्त ठहर गया। 5 दिसंबर को रिलीज हुई इस फिल्म ने आज 6 जनवरी तक अपने सफर का एक शानदार महीना पूरा कर लिया है। इस दौरान कई बड़े बजट की फिल्में आईं और गईं, लेकिन (Cinematic dominance) का जो परचम इस फिल्म ने लहराया है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। फिल्म की सफलता की कहानी सिर्फ रुपयों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो दिग्गज अभिनेताओं के अभिनय कौशल की एक महाजंग बन चुकी है।

जब लाइमलाइट की जंग में रणवीर पर भारी पड़े अक्षय खन्ना
फिल्म की रिलीज के बाद से ही हर तरफ एक नई बहस छिड़ गई है। जहां रणवीर सिंह फिल्म के मुख्य चेहरा थे, वहीं अक्षय खन्ना ने अपनी रहस्यमयी और खामोश अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया। फिल्म में रहमान डकैत के करीबी ‘डोंगा’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता नवीन कौशिक ने हाल ही में (Character popularity analysis) पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि कैसे एक सपोर्टिंग रोल ने लीड एक्टर की मेहनत और चर्चा को अपनी ओर मोड़ लिया, जो फिल्म इंडस्ट्री में कम ही देखने को मिलता है।
सेट की खामोशी और अक्षय खन्ना का वो डरावना जोन
नवीन कौशिक ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि अक्षय खन्ना फिल्म के सेट पर अन्य कलाकारों से काफी दूरी बनाकर रखते थे। वह अक्सर अपने ही विचारों में खोए रहते थे, जिसका कारण शायद (Method acting techniques) का सहारा लेना था। अक्षय का यह व्यवहार उनके किरदार ‘रहमान डकैत’ से मेल खाता था, जो बेहद अनप्रिडिक्टेबल और शांत स्वभाव का था। सेट पर जब अन्य कलाकार हंसी-मजाक करते थे, तब अक्षय एक अलग कोने में बैठकर अपने किरदार की रूह को पकड़ने की कोशिश कर रहे होते थे।
रणवीर सिंह का जादुई व्यक्तित्व और हजार वोल्ट की एनर्जी
अक्षय खन्ना के विपरीत, रणवीर सिंह सेट पर एक अलग ही ऊर्जा लेकर आते थे। नवीन कौशिक के अनुसार, रणवीर (On set environment) को इतना जीवंत बना देते थे कि आलस के लिए वहां कोई जगह नहीं बचती थी। वह हर किसी से गले मिलते, बातें करते और एक दोस्त की तरह पेश आते थे। इतने बड़े सुपरस्टार होने के बावजूद उनके व्यवहार में कोई घमंड नहीं था, बल्कि उनमें एक छोटे बच्चे जैसी जिज्ञासा हमेशा बरकरार रहती थी।
क्या रणवीर सिंह के साथ हुई है असल में नाइंसाफी?
फिल्म के भीतर की केमिस्ट्री और असल जिंदगी के समीकरणों पर बात करते हुए नवीन ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अक्षय खन्ना ने निस्संदेह एक यादगार किरदार निभाया है, लेकिन रणवीर सिंह के काम को (Acting performance evaluation) में नजरअंदाज कर दिया गया। रणवीर ने अपनी आवाज बदलने से लेकर शरीर की भाषा तक पर जो बारीक काम किया है, वह बेहद मुश्किल था। एक ऐसा इंसान जो खुद ऊर्जा से भरा हो, उसे पर्दे पर इतना संयमित और शांत दिखाना वाकई कड़ी तपस्या का परिणाम है।
गाने के उस एक पल में छुपा था रणवीर का संयम
नवीन ने एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए बताया कि ‘FA9LA’ गाने के दौरान जब पूरी भीड़ और कलाकार झूम रहे थे, तब रणवीर के किरदार को शांत रहना था। संगीत की थाप पर (Emotional self control) बनाए रखना एक अभिनेता के लिए सबसे कठिन परीक्षा होती है। हालांकि, दर्शकों की नजरें अक्षय खन्ना के जबरदस्त औरा पर जमी रहीं, जिसके कारण रणवीर के इन सूक्ष्म प्रयासों की उतनी चर्चा नहीं हुई जितनी होनी चाहिए थी।
पर्दे के पीछे का भाईचारा और आपसी सम्मान
भले ही लोग लाइमलाइट चुराने की बातें कर रहे हों, लेकिन अक्षय और रणवीर के बीच का रिश्ता बेहद गरिमापूर्ण रहा। नवीन बताते हैं कि दोनों के बीच (Professional bond) काफी मजबूत था। रिहर्सल के दौरान वे एक-दूसरे का पूरा ख्याल रखते थे। यहां तक कि छोटी-छोटी बातों जैसे एक-दूसरे के लिए कुर्सी लगाने तक में उनका आपसी सम्मान झलकता था। यह फिल्म इन दो अलग-अलग स्कूलों के अभिनेताओं के मिलन का एक बेहतरीन दस्तावेज बन गई है।
भविष्य की यादों में ‘धुरंधर’ का स्थान
‘धुरंधर’ ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े हैं, बल्कि यह बहस भी छेड़ दी है कि एक अच्छा प्रदर्शन क्या होता है। क्या वह जो पर्दे पर हावी हो जाए, या वह जो चुपचाप (Subtle acting skills) के जरिए किरदार में जान फूंक दे? आने वाले सालों में रहमान डकैत का किरदार यकीनन एक कल्ट क्लासिक बनेगा, लेकिन रणवीर सिंह का समर्पण भी सच्चे सिनेमा प्रेमियों के दिलों में हमेशा सुरक्षित रहेगा।