RekhaBhardwaj – कॉलेज की दोस्ती से शुरू हुई 42 साल पुराने रिश्ते की कहानी
RekhaBhardwaj – हिंदी फिल्म जगत के चर्चित संगीतकार और फिल्मकार विशाल भारद्वाज तथा प्रसिद्ध गायिका रेखा भारद्वाज की प्रेम कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं मानी जाती। दोनों की पहली मुलाकात दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में हुई थी, जहां पढ़ाई के दौरान शुरू हुई दोस्ती समय के साथ गहरे रिश्ते में बदल गई। संगीत के प्रति साझा लगाव ने दोनों को करीब लाया और आगे चलकर यही रिश्ता जीवनसाथी बनने तक पहुंचा।

कॉलेज परिसर में हुई थी पहली मुलाकात
वर्ष 1984 में हिंदू कॉलेज में पढ़ाई के दौरान विशाल भारद्वाज कॉलेज में नए छात्र थे, जबकि रेखा उनसे एक वर्ष सीनियर थीं। एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान रेखा ने मंच पर अपनी प्रस्तुति दी, जिसने विशाल को काफी प्रभावित किया। संगीत में रुचि होने के कारण दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे यह परिचय मजबूत दोस्ती में बदल गया। कुछ समय बाद दोनों ने एक-दूसरे के साथ अपना भविष्य देखने का फैसला किया।
सपनों के साथ मुंबई पहुंचे
कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों ने संगीत के क्षेत्र में करियर बनाने के उद्देश्य से मुंबई का रुख किया। शुरुआती दौर आसान नहीं था। सीमित संसाधनों और नई चुनौतियों के बीच विशाल ने एक संगीत कंपनी में काम शुरू किया, जबकि रेखा गायन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार प्रयास करती रहीं। संघर्ष के उस दौर में दोनों ने एक-दूसरे का पूरा साथ निभाया।
सादगी से की थी शादी
करियर धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा तो दोनों ने बिना किसी बड़े आयोजन के कोर्ट मैरिज कर ली। शादी के बाद रेखा को कई बार उनकी व्यक्तिगत पहचान से अधिक विशाल भारद्वाज की पत्नी के रूप में देखा जाने लगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह दौर उनके लिए आत्ममंथन का समय था और इसी दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाने का निर्णय लिया।
आध्यात्मिक यात्रा ने बदला नजरिया
रेखा भारद्वाज कुछ समय के लिए ओशो आश्रम चली गईं, जहां उन्होंने ध्यान और आध्यात्मिक जीवन के माध्यम से स्वयं को समझने का प्रयास किया। बाद में विशाल भारद्वाज भी वहां पहुंचे। इस अनुभव ने दोनों के जीवन और सोच पर गहरा प्रभाव डाला। इसके बाद दोनों ने अपने रिश्ते और पेशेवर जीवन को नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया।
संगीत की दुनिया में बनाई अलग पहचान
मुंबई लौटने के बाद विशाल भारद्वाज ने फिल्म निर्देशन और संगीत निर्देशन में अपनी अलग पहचान बनाई। दूसरी ओर, रेखा भारद्वाज की आवाज भी हिंदी सिनेमा की सबसे विशिष्ट आवाजों में शामिल हो गई। विशाल की कई फिल्मों में रेखा ने अपनी गायकी से यादगार गीत दिए। ‘नमक इश्क का’, ‘डार्लिंग’ और ‘ससुराल गेंदा फूल’ जैसे गीत आज भी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय हैं और दोनों की रचनात्मक साझेदारी की मिसाल माने जाते हैं।
चार दशक से अधिक का साथ
लगभग चार दशक से भी अधिक समय से विशाल और रेखा भारद्वाज का साथ कायम है। निजी जीवन और पेशेवर सफर में दोनों ने एक-दूसरे का निरंतर सहयोग किया है। उनकी कहानी इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि साझा रुचि, विश्वास और धैर्य किसी भी रिश्ते को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।