Blood Pressure – घर पर बीपी मापते समय इन बातों का रखें विशेष ख्याल
Blood Pressure– उच्च रक्तचाप की समस्या आज बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है। यही वजह है कि अब कई घरों में डिजिटल ब्लड प्रेशर मॉनिटर आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि, घर पर बीपी मापते समय एक सवाल अक्सर लोगों को परेशान करता है कि रीडिंग दाएं हाथ की सही मानी जाए या बाएं हाथ की। विशेषज्ञों के अनुसार, सही तरीका अपनाने से अधिक सटीक परिणाम मिल सकते हैं और दोनों बाजुओं की रीडिंग को समझना भी जरूरी है।

दोनों बाजुओं की रीडिंग में अंतर होना कितना सामान्य?
हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, दाएं और बाएं हाथ की ब्लड प्रेशर रीडिंग में थोड़ा-बहुत अंतर होना असामान्य नहीं है। कई लोगों में दाएं हाथ की रीडिंग बाएं हाथ की तुलना में थोड़ी अधिक दर्ज हो सकती है। सामान्य परिस्थितियों में यदि सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रीडिंग के बीच लगभग 20/10 mmHg तक का अंतर हो, तो इसे सामान्य सीमा के भीतर माना जा सकता है।
कब बढ़ जाता है चिंता का कारण?
कुछ मामलों में बाएं हाथ की रीडिंग दाएं हाथ से अधिक भी आ सकती है। यदि दोनों हाथों की रीडिंग में अंतर सामान्य सीमा के भीतर है, तो आमतौर पर चिंता की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन यदि यह अंतर लगातार 20/10 mmHg से अधिक बना रहता है, तो यह रक्त वाहिकाओं से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय जांच कराना उचित माना जाता है, ताकि किसी संभावित स्वास्थ्य समस्या का समय पर पता लगाया जा सके।
किस हाथ की रीडिंग को दें प्राथमिकता?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पहली बार ब्लड प्रेशर मापते समय दोनों बाजुओं की रीडिंग लेना बेहतर होता है। यदि दोनों में अंतर दिखाई देता है, तो आगे की निगरानी उसी हाथ से करनी चाहिए, जिसमें लगातार अधिक रीडिंग दर्ज हो रही हो। इससे भविष्य की रीडिंग की तुलना करना आसान होता है और ब्लड प्रेशर की स्थिति का अधिक सटीक आकलन किया जा सकता है।
घर पर बीपी मापते समय रखें इन बातों का ध्यान
सही रीडिंग के लिए ब्लड प्रेशर मापने से पहले कम से कम पांच मिनट तक आराम की स्थिति में बैठें। पीठ को कुर्सी का सहारा दें, दोनों पैर जमीन पर सीधे रखें और जिस हाथ में बीपी माप रहे हों, उसे हृदय की ऊंचाई के बराबर रखें। एक बार की बजाय दो या तीन रीडिंग लें और हर रीडिंग के बीच एक से दो मिनट का अंतर रखें। इसके बाद प्राप्त रीडिंग का औसत अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
नियमित निगरानी क्यों है जरूरी?
यदि किसी व्यक्ति को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या मधुमेह जैसी समस्या है, तो घर पर समय-समय पर बीपी की जांच करना उपयोगी हो सकता है। नियमित मॉनिटरिंग से ब्लड प्रेशर में होने वाले बदलावों पर नजर रखी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर समय रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। किसी भी असामान्य या लगातार बढ़ी हुई रीडिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह को दें प्राथमिकता
घर पर किया गया ब्लड प्रेशर परीक्षण स्वास्थ्य की निगरानी में सहायक हो सकता है, लेकिन इसे चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि लगातार उच्च रीडिंग मिले, दोनों हाथों की रीडिंग में असामान्य अंतर दिखाई दे या चक्कर आना, सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण महसूस हों, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है।