स्वास्थ्य

Diabetes – जांघ की लंबाई से भी सामने आ सकता है टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम

Diabetes आज दुनिया की बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 589 मिलियन यानी 59 करोड़ लोग इस बीमारी के साथ जीवन बिता रहे हैं और इसके बढ़ते मामलों को लेकर विशेषज्ञ लगातार चिंता जता रहे हैं। डायबिटीज केवल रक्त में शुगर बढ़ने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि लंबे समय तक नियंत्रित न रहने पर आंखों, किडनी और हृदय से जुड़ी परेशानियों का खतरा भी बढ़ सकता है। आमतौर पर इसकी जांच ब्लड शुगर और एचबीए1सी जैसे परीक्षणों से की जाती है, लेकिन एक नए अध्ययन में शरीर की बनावट से जुड़े एक ऐसे संकेत की चर्चा की गई है, जो भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज या प्रीडायबिटीज के जोखिम का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है।

thigh length diabetes risk study

घर बैठे जोखिम का शुरुआती अंदाजा लगाने की कोशिश

डायबिटीज कई लोगों में लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी रह सकती है। थकान, अधिक प्यास लगना या बार-बार पेशाब आने जैसे संकेतों को कई बार सामान्य समस्या समझ लिया जाता है। इसी वजह से कुछ लोगों को बीमारी का पता तब चलता है, जब ब्लड शुगर की नियमित जांच कराई जाती है। डेनमार्क के शोधकर्ताओं ने इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए एक ऑनलाइन जोखिम आकलन उपकरण तैयार किया है, जिसे घर पर उपलब्ध सामान्य जानकारी और शरीर की कुछ माप के आधार पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

MEDWACS में किन जानकारियों का इस्तेमाल होता है

अध्ययन में बताए गए इस उपकरण का नाम MEDWACS है। इसमें व्यक्ति की उम्र, लिंग और बीएमआई जैसी जानकारी के साथ कुछ सवालों के जवाब लिए जाते हैं। इसके अलावा शरीर की कुछ माप भी दर्ज करनी होती हैं। शोधकर्ताओं ने इसे अमेरिका के नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे से जुड़े लगभग तीन दशकों के स्वास्थ्य आंकड़ों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण की मदद से विकसित किया है।

शोधकर्ताओं ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के अलग-अलग समूहों में इसकी उपयोगिता का परीक्षण किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस उपकरण ने उन लोगों की पहचान करने में उपयोगी परिणाम दिखाए, जिनमें प्रीडायबिटीज या ऐसी टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम था, जिसका अभी तक पता नहीं चला था। हालांकि, यह किसी व्यक्ति में बीमारी की चिकित्सकीय पुष्टि करने वाला परीक्षण नहीं है।

जांघ की लंबाई ने क्यों खींचा शोधकर्ताओं का ध्यान

अध्ययन में सामने आए संकेतों में जांघ की लंबाई भी शामिल थी। शोधकर्ताओं के अनुसार, छोटी जांघ की लंबाई और टाइप-2 डायबिटीज या प्रीडायबिटीज के बढ़े हुए जोखिम के बीच संबंध देखा गया। इसके पीछे जीवन के शुरुआती वर्षों में पोषण और शरीर के विकास से जुड़ी संभावित भूमिका पर चर्चा की गई है।

जांघ की सबसे बड़ी हड्डी फीमर होती है और इसकी लंबाई बचपन के दौरान शरीर के विकास से संबंधित संकेत दे सकती है। शोधकर्ताओं का तर्क है कि शुरुआती उम्र में पर्याप्त पोषण न मिलने से हड्डियों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है और इसका संबंध आगे चलकर कुछ स्वास्थ्य जोखिमों से हो सकता है। हालांकि, यह संबंध किसी एक व्यक्ति के मामले में बीमारी की भविष्यवाणी नहीं करता।

जांघ की मांसपेशियां भी हो सकती हैं अहम

शोध में जांघों की मांसपेशियों को भी इस संभावित संबंध का एक कारण माना गया है। जांघ शरीर के बड़े मांसपेशी समूहों में से एक है और मांसपेशियां रक्त में मौजूद ग्लूकोज के इस्तेमाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, मांसपेशियों की मात्रा और शरीर की ग्लूकोज इस्तेमाल करने की क्षमता के बीच संबंध होने के कारण शरीर की बनावट और डायबिटीज जोखिम के बीच कड़ी देखी जा सकती है।

केवल जांघ की लंबाई से नहीं होती डायबिटीज की पुष्टि

विशेषज्ञों की ओर से यह स्पष्ट करना जरूरी है कि छोटी जांघ होना अपने आप में डायबिटीज का संकेत या बीमारी की पुष्टि नहीं माना जा सकता। MEDWACS जैसे जोखिम आकलन उपकरण का उद्देश्य संभावित खतरे वाले लोगों को आगे चिकित्सकीय जांच के लिए प्रेरित करना है। यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज से जुड़े लक्षण हैं या वह जोखिम को लेकर चिंतित है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ब्लड शुगर और एचबीए1सी जैसी मानक जांच कराना अधिक विश्वसनीय तरीका है। शरीर की किसी एक विशेषता के आधार पर स्वयं बीमारी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

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