Mohan Bhagwat – कनाडा दौरे से पहले RSS को लेकर राजनीतिक विवाद गहराया
Mohan Bhagwat के प्रस्तावित कनाडा दौरे को लेकर वहां राजनीतिक और सामुदायिक बहस तेज हो गई है। न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के दो सांसदों ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और संबंधित मंत्रियों को पत्र भेजकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने तथा उसके प्रमुख मोहन भागवत के कनाडा प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। दूसरी ओर, इंडो-कैनेडियन समुदाय से जुड़े लोगों ने इस मांग का विरोध किया है। उनका कहना है कि किसी पूरे संगठन और उससे जुड़े समुदाय को लेकर इस तरह की व्यापक टिप्पणी सामाजिक विभाजन को बढ़ा सकती है।

NDP सांसदों ने सरकार से क्या मांग की
रिपोर्ट के मुताबिक, सांसद हीथर मैकफर्सन और जेनी क्वान ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के अलावा सार्वजनिक सुरक्षा, विदेश मामलों और आव्रजन से जुड़े मंत्रियों को पत्र लिखा। दोनों सांसदों ने RSS को लेकर गंभीर आरोप लगाए और संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग दोहराई। उन्होंने भागवत को कनाडा में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की अपील भी की।
मैकफर्सन ने अपने पत्र में कहा कि कुछ अल्पसंख्यक समुदायों के बीच ऐसी आशंका है कि भागवत की मौजूदगी से नफरत और हिंसा का माहौल बढ़ सकता है। वहीं क्वान ने कनाडा के आव्रजन और शरणार्थी संरक्षण कानून के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए RSS तथा उसके सदस्यों को देश में प्रवेश के लिहाज से अयोग्य ठहराने की मांग की। हालांकि, इन राजनीतिक मांगों पर कनाडा सरकार की ओर से किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
इंडो-कैनेडियन समुदाय ने किया विरोध
NDP सांसदों की मांग के बाद इंडो-कैनेडियन समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों और समर्थकों की ओर से विरोध अभियान शुरू किया गया। इसके तहत भेजे गए एक पत्र में सांसदों की भाषा और RSS के बारे में लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाए गए हैं। पत्र में कहा गया कि किसी बड़े हिंदू सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन को एक विशेष राजनीतिक विशेषण से संबोधित करना पूरे समुदाय के प्रति नकारात्मक धारणा पैदा कर सकता है।
विरोध करने वालों ने मांग की कि यदि RSS या उसके सदस्यों के खिलाफ कोई गंभीर कार्रवाई प्रस्तावित की जाती है तो उसके पीछे ठोस, सत्यापित और कनाडाई कानून के अनुरूप साक्ष्य होने चाहिए। उनका तर्क है कि व्यापक आरोपों का असर उन हिंदू कनाडाई नागरिकों पर भी पड़ सकता है, जिनका किसी कथित गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। 2021 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार कनाडा में करीब 8.28 लाख लोगों ने खुद को हिंदू धर्म से जुड़ा बताया था।
भागवत का प्रस्तावित दौरा क्यों चर्चा में
मोहन भागवत का प्रस्तावित कनाडा दौरा RSS प्रमुख के तौर पर देश की उनकी पहली यात्रा होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2005 में तत्कालीन सरसंघचालक केएस सुदर्शन के दौरे के बाद दो दशक से अधिक समय में किसी RSS प्रमुख की कनाडा यात्रा नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि भागवत के दौरे की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार उनका मुख्य पड़ाव टोरंटो होगा, जहां 31 अगस्त को प्रवासी समुदाय के साथ सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होने की उम्मीद है। इसके अगले दिन बैठकों का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
कनाडा के बाद अमेरिका जाने की योजना
कनाडा यात्रा के बाद भागवत के अमेरिका जाने की भी योजना बताई गई है। जानकारी के मुताबिक, उनका अमेरिकी दौरा पांच दिनों का होगा और इसका समापन न्यूयॉर्क में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के साथ होने की संभावना है। फिलहाल कनाडा में उनके प्रवेश और RSS से जुड़ी राजनीतिक मांगों पर सरकार की ओर से अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में प्रस्तावित यात्रा से पहले राजनीतिक दलों और भारतीय मूल के समुदाय के बीच जारी बहस पर नजर बनी हुई है।