Chabahar – अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरानी निगरानी ढांचे पर बढ़ी चर्चा
Chabahar- अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेना ने हाल ही में ईरान के दक्षिण-पूर्वी तटीय क्षेत्र में स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक समुद्री निगरानी टावर को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस सैन्य कार्रवाई का वीडियो भी सार्वजनिक किया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान की निगरानी क्षमता को सीमित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

सेंटकॉम ने अभियान की जानकारी दी
CENTCOM के अनुसार, यह ऑपरेशन 16 जुलाई को अंजाम दिया गया। अमेरिकी सेना ने बताया कि चाबहार के शहीद कलंतरी पोर्ट क्षेत्र में मौजूद निगरानी टावर को सटीक सैन्य कार्रवाई के जरिए निष्क्रिय किया गया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह ढांचा ईरान के समुद्री निगरानी नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा था और इसका उपयोग ओमान की खाड़ी तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता था।
समुद्री निगरानी क्षमता पर असर का दावा
अमेरिकी सेना का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद IRGC की निगरानी और समुद्री गतिविधियों के समन्वय की क्षमता प्रभावित होगी। CENTCOM के मुताबिक, संबंधित टावर रणनीतिक समुद्री मार्गों पर नजर रखने वाले नेटवर्क का हिस्सा था। अमेरिकी पक्ष ने यह भी दावा किया कि इस ढांचे के निष्क्रिय होने से क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और समुद्री मार्गों पर संभावित जोखिम कम हो सकता है।
होर्मुज क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से विभिन्न देशों तक पहुंचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसी वजह से यहां होने वाली हर सैन्य या कूटनीतिक गतिविधि पर दुनिया की नजर रहती है।
चाबहार परियोजना का भारत से भी रहा संबंध
चाबहार बंदरगाह का नाम भारत के लिए भी महत्वपूर्ण रहा है। भारत ने अतीत में इस परियोजना के विकास में ईरान के साथ सहयोग किया था, ताकि क्षेत्रीय व्यापार और मध्य एशिया तक संपर्क को मजबूत किया जा सके। हालांकि मौजूदा अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का संबंध सुरक्षा और निगरानी ढांचे से जुड़ा बताया गया है, जबकि भारत की भागीदारी बंदरगाह के व्यावसायिक और आधारभूत विकास तक सीमित रही है।
बढ़ते तनाव के बीच नई सैन्य कार्रवाई
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री इलाकों को लेकर लंबे समय से रणनीतिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती रही है। फिलहाल ईरान की ओर से अमेरिकी दावे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस कार्रवाई के प्रभाव और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित असर पर नजर रखी जा रही है।