Diplomacy – अमेरिका-ईरान समझौते की दिशा में बढ़े कदम, यूरोप में हस्ताक्षर की चर्चा…
Diplomacy – अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बाद अब दोनों देशों के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी प्रशासन और क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के हालिया बयानों से संकेत मिले हैं कि दोनों पक्ष किसी बड़े समझौते के करीब पहुंच सकते हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, यदि अंतिम सहमति बन जाती है तो इस सप्ताह के अंत तक यूरोप में समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, ईरान की ओर से अभी भी सतर्क रुख अपनाया जा रहा है और उसने अपने राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर समझौता न करने की बात दोहराई है।

ट्रंप ने समझौते को बताया महत्वपूर्ण प्रगति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वार्ता प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। उनके अनुसार, आवश्यक दस्तावेजों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद आने वाले दिनों में समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस दिशा में सकारात्मक संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा कि समझौता लागू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य गतिविधियां बहाल होने की उम्मीद है।
पाकिस्तान, कतर और यूएई की मध्यस्थ भूमिका
कूटनीतिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात ने अहम भूमिका निभाई है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के दौरान इन देशों ने दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने के प्रयास किए। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि जब हालात अधिक गंभीर होते दिख रहे थे, तब इन देशों के नेताओं ने बातचीत के जरिए तनाव कम करने की दिशा में पहल की।
समझौते के मसौदे को लेकर सामने आई जानकारी
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि समझौते का प्रारूप लगभग तैयार हो चुका है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रस्तावित दस्तावेज को “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग” नाम दिया है। लीक हुई जानकारियों के अनुसार, मसौदे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी तरह खोलने, ईरान की रोकी गई संपत्तियों को जारी करने और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर नई वार्ता शुरू करने जैसे बिंदु शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इन कथित लीक रिपोर्टों की पुष्टि नहीं की है और कुछ दावों को गलत बताया है।
ईरान ने रखा सावधानीपूर्ण रुख
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि वार्ता में प्रगति हुई है, लेकिन अभी अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की संप्रभुता और रणनीतिक हितों से जुड़े मुद्दों पर ईरान कोई समझौता नहीं करेगा। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान ने अपने अधिकारों और नियंत्रण को महत्वपूर्ण बताया है।
इजरायल की चिंता बरकरार
संभावित समझौते की खबरों के बीच इजरायल ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनका देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सतर्क बना रहेगा। उन्होंने दोहराया कि इजरायल किसी भी ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं करेगा जिससे ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने का अवसर मिले। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर उनकी और अमेरिकी नेतृत्व की सोच में व्यापक समानता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम
खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता भारत सहित कई देशों के लिए आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि क्षेत्र में तनाव कम होता है और समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार को राहत मिल सकती है। साथ ही, खाड़ी क्षेत्र और समुद्री मार्गों पर कार्यरत हजारों भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा भी मजबूत होगी। ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की भी संभावना जताई जा रही है।