EnergySecurity- होर्मुज तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान पर बढ़ाया दबाव
EnergySecurity – होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल ही में तीन तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। घटनाक्रम के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी सख्त कदम उठाए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को तेल निर्यात के लिए दी गई अस्थायी छूट समाप्त कर दी है, जबकि सैन्य कार्रवाई की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अमेरिकी कार्रवाई से बढ़ा तनाव
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि ईरान की हालिया गतिविधियों को युद्धविराम की भावना के विपरीत बताया गया है। इसी के साथ ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई कार्रवाई शुरू किए जाने की पुष्टि भी की गई। अमेरिका का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है।
ईरान में कई स्थानों पर विस्फोट की खबर
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बुधवार तड़के दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरीक, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास के आसपास विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। प्रारंभिक रिपोर्टों में दावा किया गया कि कुछ तटीय और बंदरगाह से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। वहीं रॉयटर्स के हवाले से एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि कार्रवाई के दौरान ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, तटीय निगरानी नेटवर्क, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों, एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और ड्रोन लॉन्च साइटों को लक्ष्य बनाया गया।
तेल निर्यात पर दी गई छूट वापस
अमेरिका के वित्त विभाग ने 22 जून को जारी उस सामान्य लाइसेंस को वापस लेने का फैसला किया है, जिसके तहत ईरान को 21 अगस्त तक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के सीमित निर्यात की अनुमति मिली थी। नई घोषणा के अनुसार, संबंधित लेनदेन समाप्त करने के लिए अब 17 जुलाई तक का समय निर्धारित किया गया है। इस फैसले को वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान ने फैसले का किया विरोध
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कदम की आलोचना करते हुए इसे पूर्व सहमति वाले ढांचे का उल्लंघन बताया है। मंत्रालय का कहना है कि यह निर्णय क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। ईरान ने यह भी कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
टैंकर हमलों के बाद बढ़ी कूटनीतिक हलचल
तनाव की मौजूदा स्थिति की शुरुआत होर्मुज क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद हुई। कतर ने अपने एलएनजी टैंकर अल रेकय्यात पर हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्टों के अनुसार, हमले में जहाज के इंजन रूम में आग लगी, हालांकि चालक दल सुरक्षित रहा। वहीं ओमान तट के पास सऊदी अरब के एक सुपरटैंकर को भी नुकसान पहुंचने की सूचना सामने आई है।
क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
कतर ने इस घटना के बाद ईरान के उप-राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। दूसरी ओर, ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसके खिलाफ लगाए जा रहे दावे भ्रामक हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि क्षेत्र के संवेदनशील समुद्री मार्गों पर संचालन के दौरान सुरक्षा समन्वय का पालन आवश्यक है। घटनाक्रम के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या तनाव और गहराता है।