MiddleEastTensions – अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की कोशिश, कतर और सऊदी ने रोकी कार्रवाई
MiddleEastTensions – पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बीच खाड़ी क्षेत्र में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। ताजा घटनाक्रम में कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमले की कोशिश को वहां की वायु रक्षा प्रणाली ने विफल कर दिया। इस बीच क्षेत्र के अन्य देशों में भी मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों के कारण सुरक्षा चिंताएं गहराती जा रही हैं।

कतर के अल उदीद एयर बेस पर ड्रोन हमला विफल
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक कतर के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कतर अमीरी एयर डिफेंस फोर्सेज ने अल उदीद एयर बेस को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमले को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। यह एयर बेस अमेरिका के लिए पश्चिम एशिया में एक अहम सैन्य केंद्र माना जाता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस ठिकाने पर लगभग दस हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और यह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों का प्रमुख संचालन केंद्र है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया घटनाओं के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सैन्य गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
सऊदी अरब ने भी मिसाइल हमले को रोका
इसी बीच सऊदी अरब ने भी अपनी राजधानी रियाद के पास स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर किए गए मिसाइल हमले को विफल कर दिया। सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि एयर डिफेंस सिस्टम ने तीन बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
यह एयर बेस भी अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्थाओं को और सख्त कर दिया गया है ताकि भविष्य में किसी भी संभावित हमले से निपटा जा सके।
ईरान का दावा: अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को बनाया निशाना
इससे पहले ईरान की सेना ने मंगलवार को जारी बयान में कहा था कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों को लक्ष्य बनाकर ड्रोन अभियान चलाया है। ईरानी सेना के मुताबिक उसके थल, वायु और नौसैनिक बलों से जुड़े ड्रोन ने कथित रूप से उन क्षेत्रों को निशाना बनाया जहां अमेरिकी बलों और इजरायल से जुड़े सैन्य ढांचे मौजूद हैं।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस बयान के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
कुवैत में अमेरिकी दूतावास बंद करने का निर्णय
इधर अमेरिकी विदेश विभाग ने भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कुवैत में स्थित अपने दूतावास को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की है। अधिकारियों का कहना है कि हालिया हमलों और बढ़ते सैन्य तनाव के कारण यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार हाल के दिनों में कुवैत के आसपास भी ड्रोन और मिसाइल गतिविधियों की घटनाएं सामने आई हैं। इससे पहले हुए एक ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत की खबर भी आई थी, जिसके बाद सुरक्षा स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
अजरबैजान ने भी लगाया ड्रोन हमले का आरोप
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब अन्य देशों तक भी पहुंचता दिखाई दे रहा है। अजरबैजान ने आरोप लगाया है कि ईरान की ओर से उसके नखचिवान क्षेत्र पर ड्रोन हमला किया गया, जिसमें चार नागरिक घायल हो गए और हवाई अड्डे की एक इमारत को नुकसान पहुंचा।
अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इस घटना को गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। देश के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे आक्रामक कार्रवाई बताया और सेना को जवाबी कदम उठाने की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार नखचिवान की दिशा में भेजे गए चार ड्रोन में से एक को सेना ने रास्ते में ही निष्क्रिय कर दिया, जबकि अन्य ड्रोन नागरिक ढांचों के पास गिरे। इनमें एक स्कूल परिसर भी शामिल बताया गया है।
क्षेत्रीय संघर्ष के फैलने की आशंका
हाल के घटनाक्रमों ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना दिया है। कई देशों में सैन्य ठिकानों पर हमलों की कोशिश और जवाबी तैयारियों के बीच यह आशंका जताई जा रही है कि यदि हालात नियंत्रित नहीं हुए तो क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है, ताकि बढ़ते सैन्य तनाव को सीमित किया जा सके।



