अंतर्राष्ट्रीय

NATOAlliance – ईरान युद्ध के बीच नाटो पर उठे बड़े सवाल

NATOAlliance – ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अब दुनिया के सबसे बड़े सैन्य गठबंधन नाटो की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी प्रशासन के हालिया बयानों ने इस गठबंधन के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। खासतौर पर तब, जब यूरोपीय देशों ने ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों में अमेरिका का साथ देने से दूरी बनाई है। इस स्थिति ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के रिश्तों में दरार की आशंका को और गहरा कर दिया है।

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अमेरिका ने जताई गठबंधन की समीक्षा की जरूरत

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि ईरान से जुड़े मौजूदा हालात के बाद नाटो के साथ संबंधों पर पुनर्विचार किया जा सकता है। उनका कहना है कि इस संघर्ष के समाप्त होने के बाद यह देखना जरूरी होगा कि यह गठबंधन अमेरिका के हितों के लिए कितना उपयोगी है। हालांकि, अंतिम निर्णय राष्ट्रपति स्तर पर ही लिया जाएगा।

यूरोपीय सहयोगियों के रुख से बढ़ी दूरी

हाल के घटनाक्रमों में यह देखा गया कि कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका को सैन्य सहयोग देने से इनकार कर दिया। कुछ देशों ने अपने हवाई क्षेत्र या सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति भी नहीं दी। इसने अमेरिका की रणनीतिक योजनाओं को प्रभावित किया और सहयोग के स्तर पर सवाल खड़े कर दिए। इन घटनाओं के बाद दोनों पक्षों के बीच विश्वास की स्थिति कमजोर होती नजर आई।

ट्रंप पहले भी कर चुके हैं आलोचना

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नाटो को लेकर आलोचनात्मक रुख रखते आए हैं। उनका मानना रहा है कि यूरोपीय देश रक्षा खर्च में पर्याप्त योगदान नहीं करते और इसका बोझ अमेरिका पर पड़ता है। हालिया घटनाओं ने इस बहस को और तेज कर दिया है। ट्रंप ने पहले भी यह कहा था कि यदि सहयोगियों का समर्थन नहीं मिलता, तो गठबंधन का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

सैन्य ठिकानों की उपयोगिता पर सवाल

रुबियो ने यह भी कहा कि नाटो का एक बड़ा लाभ यूरोप में मौजूद सैन्य ठिकानों का उपयोग रहा है। लेकिन अगर इन ठिकानों का इस्तेमाल अमेरिका अपने हितों के लिए नहीं कर सकता, तो इस गठबंधन की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में यह व्यवस्था संतुलित साझेदारी के बजाय एकतरफा लगने लगती है।

हालिया घटनाओं ने बढ़ाया तनाव

हाल के दिनों में सामने आई कुछ घटनाओं ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। उदाहरण के तौर पर, कुछ देशों ने अमेरिकी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि सभी सहयोगी एक समान रुख नहीं अपना रहे हैं। इन फैसलों ने दोनों पक्षों के बीच मतभेद को उजागर किया है।

वैश्विक राजनीति पर असर की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और नाटो के बीच मतभेद बढ़ते हैं, तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा ढांचे पर भी पड़ सकता है। नाटो की मूल अवधारणा सामूहिक सुरक्षा पर आधारित रही है, लेकिन मौजूदा हालात ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह गठबंधन किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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