NepalPolitics – बेदखली अभियान के विरोध में नेपाल सरकार पर बढ़ा जनदबाव
NepalPolitics- नेपाल में राजधानी काठमांडू के नदी किनारे स्थित अवैध बस्तियों को हटाने की सरकारी कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। बेदखली अभियान से प्रभावित लोगों और उनके समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर पुनर्वास की मांग उठाई है। प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति द्वारा कथित आत्मदाह किए जाने और बाद में उसकी मौत की खबर के बाद पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। इस बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में भी लिया है।

पुनर्वास की मांग को लेकर बढ़ा विरोध
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिन परिवारों के मकान हटाए जा रहे हैं, उनके लिए पहले वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि बिना पुनर्वास योजना के चलाए जा रहे अभियान से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। इसी मुद्दे को लेकर राजधानी के विभिन्न हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं और सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की जा रही है।
पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ा तनाव
रविवार को काठमांडू के माइतीघर क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और बेदखली अभियान के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रमुख आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। वहीं, पुलिस की कार्रवाई में घायल हुए कुछ लोगों का उपचार भी कराया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन और अधिक तेज होने की बात सामने आ रही है।
अवैध बस्तियों को हटाने का अभियान जारी
सरकार ने नदी किनारे स्थित अतिक्रमण हटाने के उद्देश्य से अभियान शुरू किया है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और शहरी विकास योजनाओं के तहत की जा रही है। अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है। हालांकि प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त समय और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई।
पहले भी उठ चुका था यह मुद्दा
रिपोर्टों के अनुसार राजधानी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार रहते हैं, जिन्होंने वर्षों से सरकारी भूमि पर अस्थायी आवास बना रखे हैं। इस विषय पर पहले भी प्रशासनिक स्तर पर चर्चा होती रही है। अब जब बेदखली अभियान तेज हुआ है, तो प्रभावित लोगों और सामाजिक संगठनों ने पुनर्वास नीति को प्राथमिकता देने की मांग दोहराई है। हाल के घटनाक्रम के बाद सरकार की इस नीति पर सार्वजनिक बहस भी तेज हो गई है।
घटनाक्रम पर बनी हुई है नजर
प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बीच स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों और आंदोलन से जुड़े लोग सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं जारी हैं तथा आगे की स्थिति पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।