झारखण्ड

Encroachment – जमशेदपुर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर उठे सवाल

Encroachment – जमशेदपुर में अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में है। गुरुवार को जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) ने भालूबासा चौक इलाके में अभियान चलाते हुए छह दुकानों को हटाया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के उद्देश्य से की गई, जबकि प्रभावित दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने इस पर आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

jamshedpur encroachment removal action

कार्रवाई के बाद बढ़ी नाराजगी

दुकानों को हटाए जाने के बाद प्रभावित परिवारों और आसपास के लोगों में असंतोष देखा गया। उनका कहना है कि प्रशासन ने केवल चुनिंदा दुकानों पर कार्रवाई की है, जबकि क्षेत्र में कई अन्य निर्माण भी ऐसे हैं जिनकी वैधता पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि अतिक्रमण हटाना ही उद्देश्य है तो सभी मामलों की समान रूप से जांच होनी चाहिए और कार्रवाई भी एक जैसी होनी चाहिए।

दुकानदारों ने नोटिस मिलने की पुष्टि की

प्रभावित दुकानदार संजय साव ने बताया कि उन्हें प्रशासन की ओर से पहले ही नोटिस जारी किया गया था। उनके अनुसार, नोटिस मिलने के बाद वे संबंधित कार्यालय पहुंचे थे, जहां उन्हें बताया गया कि दुकान के पीछे स्थित भूमि के स्वामियों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है। संजय साव का दावा है कि उनका परिवार कई दशकों से उसी स्थान पर व्यवसाय कर रहा है और उन्हें कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति है।

चयनात्मक कार्रवाई का आरोप

स्थानीय निवासियों का कहना है कि भालूबासा चौक क्षेत्र में कई ऐसी दुकानें और निर्माण मौजूद हैं, जिनकी भूमि संबंधी स्थिति स्पष्ट नहीं है। लोगों का आरोप है कि केवल छह दुकानों को हटाना कई सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि प्रशासन को पूरे क्षेत्र का सर्वे कर सभी दुकानदारों से भूमि से जुड़े दस्तावेज मांगने चाहिए और उसके बाद नियमों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी उठे प्रश्न

कुछ स्थानीय नागरिकों ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि भूमि स्वामित्व को लेकर विवाद है तो संबंधित पक्षों को अदालत में अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। कई लोगों का मानना है कि अंतिम निर्णय के बाद ही तोड़फोड़ जैसी कार्रवाई की जानी अधिक उचित होती।

प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ दिखाई सख्ती

राज्य के विभिन्न हिस्सों में हाल के दिनों में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को हाल के अभियानों के दौरान खाली कराया गया है।

दोबारा कब्जे पर होगी कानूनी कार्रवाई

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण हटाने के बाद यदि कोई व्यक्ति दोबारा सरकारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि भूमि संरक्षण और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। साथ ही सभी कार्रवाई निर्धारित नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किए जाने का दावा किया गया है।

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