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Money Plant – बारिश में ऐसे बचाएं मनी प्लांट को कीड़ों से…

Money Plant – घरों की बालकनी, खिड़की या कमरे के कोने में मनी प्लांट आसानी से नजर आ जाता है। कम देखभाल में बढ़ने वाला यह पौधा बारिश के मौसम में थोड़ी अतिरिक्त निगरानी मांगता है। लगातार नमी, गमले में जमा पानी और हवा का पर्याप्त आवागमन न होने जैसी स्थितियां जड़ों की समस्या बढ़ा सकती हैं और कुछ कीटों के लिए अनुकूल माहौल बना सकती हैं। ऐसे में पत्तियों का पीला पड़ना, उनमें छोटे छेद दिखना या पौधे की बढ़त अचानक धीमी होना संकेत हो सकते हैं कि देखभाल के तरीके में बदलाव की जरूरत है।

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बारिश में ज्यादा पानी बन सकता है परेशानी की वजह

मानसून के दौरान पौधे को पानी देने से पहले मिट्टी की नमी जांचना जरूरी है। अगर गमले की ऊपरी परत पहले से गीली है, तो दोबारा पानी देने की जल्दी नहीं करनी चाहिए। लगातार गीली मिट्टी से जड़ों में सड़न का खतरा बढ़ सकता है और पौधा कमजोर पड़ सकता है। खासकर घर के अंदर रखे मनी प्लांट को ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां बारिश का पानी सीधे गमले में न पहुंचे। गमले के नीचे पानी जमा होने से रोकना भी उतना ही जरूरी है।

पत्तियों में छेद दिखें तो पहले कीट पहचानें

पत्तियों पर छोटे छेद या किनारों से कुतरे हुए हिस्से दिखाई देने पर तुरंत कोई भी घरेलू घोल डालने के बजाय पौधे को ध्यान से देखना चाहिए। पत्तियों की निचली सतह, नई कोंपलों और तने के आसपास छोटे कीट, चिपचिपा पदार्थ या जाले जैसी चीजें दिखाई दे सकती हैं। प्रभावित पत्तियों को पौधे के बाकी हिस्सों से अलग करना शुरुआती स्तर पर मददगार हो सकता है। गंभीर संक्रमण होने पर पौधों के लिए उपलब्ध उपयुक्त कीटनियंत्रक का इस्तेमाल उसके लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही करना चाहिए।

नीम खली का इस्तेमाल करते समय रखें सावधानी

पौधों की देखभाल में नीम आधारित सामग्री का इस्तेमाल कई लोग करते हैं। नीम खली को मिट्टी में मिलाने से पहले उत्पाद के निर्देश देखना जरूरी है, क्योंकि मात्रा पौधे, गमले और उत्पाद की संरचना के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर थोड़ी मात्रा मिट्टी में मिलाई जाती है, लेकिन इसे जरूरत से ज्यादा डालना पौधे के लिए फायदेमंद नहीं होगा। अगर पौधे की जड़ों में सड़न या फंगस की समस्या पहले से मौजूद है, तो केवल नीम खली पर निर्भर रहने के बजाय समस्या की सही वजह पहचानना जरूरी है।

हल्दी को कीट नियंत्रण का पक्का उपाय न मानें

पीले पत्तों या कीड़ों से प्रभावित हिस्सों पर हल्दी लगाने का घरेलू तरीका प्रचलित है, लेकिन इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कीट नियंत्रण उपचार मानना उचित नहीं है। हल्दी में कुछ रोगाणुरोधी गुण पाए जाते हैं, फिर भी इससे पौधे पर मौजूद सभी कीट या फंगस खत्म हो जाएंगे, इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती। पत्तियों पर कोई भी घरेलू मिश्रण लगाने से पहले पौधे के एक छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर है। बहुत ज्यादा प्रभावित या खराब पत्तियों को साफ कैंची से हटाना और पौधे की सामान्य स्थिति पर नजर रखना अधिक व्यावहारिक कदम हो सकता है।

गमले की निकासी और रोशनी पर दें ध्यान

मनी प्लांट को स्वस्थ रखने में मिट्टी और गमले की जल निकासी की बड़ी भूमिका होती है। गमले में नीचे पर्याप्त छेद होने चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। बारिश के दिनों में पौधे को तेज धूप में रखने के बजाय ऐसी जगह रखना बेहतर रहता है जहां उसे पर्याप्त लेकिन अप्रत्यक्ष रोशनी मिले। पत्तियों पर जमा धूल को समय-समय पर मुलायम, नम कपड़े से साफ किया जा सकता है। साथ ही पौधे को बहुत घनी और बंद जगह में रखने से बचें, क्योंकि हवा का सामान्य आवागमन नमी से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है।

पीली पत्तियों को देखकर तुरंत घबराने की जरूरत नहीं

मनी प्लांट की एक-दो पुरानी पत्तियों का पीला होना हमेशा कीट लगने का संकेत नहीं होता। अधिक पानी, कम रोशनी, पोषक तत्वों की कमी या जड़ों से जुड़ी समस्या भी इसकी वजह हो सकती है। इसलिए केवल पत्तियों का रंग देखकर किसी एक कारण को जिम्मेदार मानना सही नहीं होगा। पौधे की मिट्टी, जड़, रोशनी और पानी देने की दिनचर्या को एक साथ देखकर बदलाव करना बेहतर तरीका है। बारिश के मौसम में यही छोटी सावधानियां मनी प्लांट को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

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