Consumer Rights – एमआरपी से अधिक कीमत वसूलना पड़ा भारी, कोर्ट ने लगाया जुर्माना
Consumer Rights – केरल में एक उपभोक्ता से बीयर की बोतल पर निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलने का मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां ग्राहक के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया। आयोग ने माना कि उत्पाद पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से ज्यादा कीमत लेना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। इसके साथ ही संबंधित सरकारी शराब निगम को ग्राहक को मुआवजा और अन्य खर्च का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

मामला पथानामथिट्टा जिले से जुड़ा है, जहां एक ग्राहक ने स्थानीय शराब बिक्री केंद्र से बीयर की बोतल खरीदी थी। विवाद तब शुरू हुआ जब ग्राहक ने उत्पाद पर छपी कीमत और बिल में दर्ज राशि के बीच अंतर देखा।
कीमत में अंतर पर उठा विवाद
शिकायत के अनुसार, 650 मिलीलीटर की बीयर बोतल पर 170 रुपये का MRP अंकित था, लेकिन बिक्री केंद्र पर ग्राहक से 180 रुपये वसूले गए। ग्राहक ने अतिरिक्त राशि को लेकर आपत्ति जताई, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
इसके बाद उपभोक्ता ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई और अतिरिक्त वसूली के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
निगम ने दी अपनी सफाई
सुनवाई के दौरान संबंधित निगम ने स्वीकार किया कि ग्राहक से 180 रुपये लिए गए थे। संस्था का कहना था कि राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए अतिरिक्त उपकर और मूल्य संशोधन के कारण नई कीमत प्रभावी हुई थी।
निगम ने यह भी तर्क दिया कि पहले से उपलब्ध बड़े स्टॉक पर नए मूल्य वाले लेबल लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था। इसी वजह से उत्पाद पर पुरानी कीमत अंकित होने के बावजूद नई दर लागू की गई थी।
आयोग ने तर्कों को नहीं माना पर्याप्त
उपभोक्ता आयोग ने मामले की समीक्षा के बाद निगम की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि किसी भी उत्पाद पर छपी MRP से अधिक कीमत वसूलना उपभोक्ता संरक्षण नियमों के विपरीत है।
फैसले में यह भी कहा गया कि आम ग्राहक से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह सरकारी आदेशों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं या मूल्य संशोधन से संबंधित आंतरिक दस्तावेजों की जानकारी रखे। ग्राहक स्वाभाविक रूप से पैकेट या बोतल पर लिखी कीमत पर भरोसा करता है।
उपभोक्ता अधिकारों पर अहम टिप्पणी
आयोग ने स्पष्ट किया कि उत्पाद पर अंकित MRP ही उपभोक्ता और विक्रेता के बीच स्वीकार्य बिक्री मूल्य माना जाता है। यदि किसी वस्तु को इससे अधिक कीमत पर बेचा जाता है तो इसे अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में रखा जा सकता है।
निर्णय में कहा गया कि इस प्रकार की अतिरिक्त वसूली उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में कमी और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन का मामला बनती है।
ग्राहक को मिलेगा मुआवजा
आयोग ने माना कि अतिरिक्त राशि वसूले जाने और उसके बाद उत्पन्न परिस्थितियों के कारण ग्राहक को मानसिक असुविधा और परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी आधार पर संबंधित निगम को आर्थिक मुआवजा देने का आदेश जारी किया गया।
फैसले के अनुसार, ग्राहक से ली गई अतिरिक्त राशि ब्याज सहित लौटाई जाएगी। साथ ही मानसिक पीड़ा और कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च के लिए अलग से भुगतान भी किया जाएगा।
उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश
यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो अक्सर छोटी रकम के अंतर को नजरअंदाज कर देते हैं। आयोग ने अपने आदेश के माध्यम से यह स्पष्ट संकेत दिया है कि MRP से अधिक कीमत वसूलना कानून के दायरे में गंभीर मामला हो सकता है और उपभोक्ता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी मंच का सहारा ले सकते हैं।