LegalRecruitment – मद्रास हाई कोर्ट पहुंचा सरकारी वकीलों की नियुक्ति विवाद, मुख्यमंत्री भी बने पक्षकार
LegalRecruitment – तमिलनाडु में सरकारी वकीलों की नियुक्ति को लेकर नया विवाद सामने आया है। विल्लुपुरम जिले में नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक महिला अधिवक्ता ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही और इसमें अनियमितताओं के साथ-साथ कथित रूप से धन लेकर नियुक्तियां किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। मामले में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, राज्य के कानून विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिका में किन लोगों को बनाया गया प्रतिवादी
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, विल्लुपुरम में वकालत करने वाली अधिवक्ता एम. ज्ञानसुंदरी ने हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अपनी याचिका में तमिलनाडु के कानून विभाग, विल्लुपुरम जिला कलेक्टर, मुख्यमंत्री एवं तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख सी. जोसेफ विजय, पार्टी महासचिव एन. आनंद और जिला सचिव एन. मोहनराज को पक्षकार बनाया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि नियुक्ति संबंधी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाई जाए और उन्हें भी चयन प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर दिया जाए।
चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल
याचिका में कहा गया है कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए 5 जून को विज्ञापन जारी किया गया था। ज्ञानसुंदरी के अनुसार, उन्होंने अलग-अलग पदों के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन किया और कलेक्टर कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों की छह प्रतियां भी जमा कराईं। उनका आरोप है कि आवेदन जमा करने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की आधिकारिक रसीद या पावती नहीं दी गई, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह पैदा होता है।
समय सीमा से पहले सूची वायरल होने का दावा
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया है कि आवेदन जमा करने की अंतिम समय सीमा 29 जून शाम 5:45 बजे तय थी। इसके बावजूद उसी दिन दोपहर करीब 12:11 बजे कथित तौर पर चयनित उम्मीदवारों की सूची विभिन्न WhatsApp समूहों में प्रसारित होने लगी। उनके अनुसार, यदि यह दावा सही है तो इससे यह आशंका उत्पन्न होती है कि आवेदन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही चयन तय कर लिया गया था। इसी आधार पर उन्होंने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
घूसखोरी के आरोप भी शामिल
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि नियुक्तियों के दौरान कुछ पदों के लिए 5 लाख रुपये से लेकर 30 लाख रुपये तक की कथित रिश्वत ली गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब उन्होंने वायरल सूची के संबंध में पार्टी के जिला पदाधिकारी से जानकारी ली तो उन्हें बताया गया कि वही अंतिम सूची है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया है कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किए बिना कुछ ऐसे अधिवक्ताओं का चयन किया गया, जिनका संबंध अन्य राजनीतिक दलों से बताया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री को पक्षकार बनाने की वजह
ज्ञानसुंदरी ने अपनी याचिका में कहा है कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को इसलिए पक्षकार बनाया गया है क्योंकि वह राज्य के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ TVK के अध्यक्ष भी हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक मंचों पर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात करते रहे हैं, इसलिए इस मामले में उनकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। फिलहाल मामला मद्रास हाई कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है और अदालत में प्रस्तुत होने वाले पक्षों तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।