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Thalapathy Vijay – तमिलनाडु में टासमैक शराब बिक्री का बदला तरीका…

Thalapathy Vijay – तमिलनाडु में शराब की सरकारी दुकानों से खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए व्यवस्था में बदलाव किया गया है। राज्य में टासमैक की दुकानों से शराब खरीदने के लिए अब ऑनलाइन आदेश देने की सुविधा शुरू की गई है। शुक्रवार से ग्राहक टासमैक की वेबसाइट के माध्यम से अपनी पसंद की शराब और बोतलों की संख्या चुन सकेंगे। भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें संबंधित सरकारी दुकान से अपना सामान प्राप्त करना होगा। इसके साथ ही दुकानों पर बिना नकद भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

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वेबसाइट से ब्रांड चुनने की सुविधा

नई व्यवस्था के तहत ग्राहक पहले टासमैक की वेबसाइट पर उपलब्ध विकल्पों में से अपनी पसंद का ब्रांड चुन सकते हैं। इसके बाद उन्हें बोतलों की संख्या निर्धारित करनी होगी और ऑनलाइन भुगतान करना होगा। आदेश पूरा होने के बाद ग्राहक को निर्धारित टासमैक दुकान पर जाकर शराब प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य खरीदारी की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करना और दुकानों पर होने वाले लेनदेन को दर्ज करने की व्यवस्था मजबूत करना बताया जा रहा है।

अतिरिक्त कीमत वसूली की शिकायतों के बाद बदलाव

टासमैक की दुकानों पर निर्धारित कीमत से अधिक रकम लिए जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ दुकानों पर ग्राहकों से बोतल के तय मूल्य से 10 से 20 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जाने की शिकायतें भी मिली थीं। इसी तरह की शिकायतों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट ने भी टासमैक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।

न्यायमूर्ति जीके इलंथिरायण की पीठ ने टिप्पणी की थी कि यदि टासमैक कर्मचारी ग्राहकों से अतिरिक्त रकम मांगते हैं, तो उन्हें पुलिस में शिकायत करने की अनुमति मिलनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि इस तरह की वसूली पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाता है, तो सरकारी शराब दुकानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती जैसे कदम पर विचार किया जा सकता है।

बिल नहीं मिलने के मुद्दे पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने टासमैक दुकानों से शराब खरीदने वाले ग्राहकों को बिल नहीं दिए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाया था। न्यायमूर्ति इलंथिरायण ने कहा था कि सामान्य खुदरा दुकानों में छोटी खरीदारी पर भी बिल दिया जाता है और केरल की सरकारी शराब दुकानों में भी बिल उपलब्ध कराया जाता है, फिर तमिलनाडु में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद शराब बिक्री की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने को लेकर चर्चा तेज हुई।

टासमैक दुकानों को पहले दी गई थी चेतावनी

अतिरिक्त रकम वसूलने की शिकायतों के बीच सरकार की ओर से टासमैक दुकानों के लिए निर्देश भी जारी किए गए थे। दुकानदारों और कर्मचारियों को ग्राहकों से निर्धारित कीमत से अधिक राशि नहीं लेने की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार कुछ स्थानों से इसके बाद भी अतिरिक्त रकम लिए जाने की शिकायतें सामने आती रहीं। ऑनलाइन आदेश और भुगतान की नई व्यवस्था को इसी पृष्ठभूमि में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

निजीकरण की चर्चा भी तेज

टासमैक की खुदरा व्यवस्था में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब तमिलनाडु में शराब बिक्री के निजीकरण को लेकर राजनीतिक चर्चा चल रही है। वर्ष 2003 से राज्य में शराब की खुदरा बिक्री मुख्य रूप से टासमैक के नियंत्रण में है। निजीकरण होने की स्थिति में यह व्यवस्था करीब दो दशक से अधिक समय बाद बड़े बदलाव से गुजर सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार सरकार की ओर से निजीकरण को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

विपक्षी दल इस संभावित बदलाव को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि निजी क्षेत्र को शराब की खुदरा बिक्री में प्रवेश देने से शराब की उपलब्धता और खपत बढ़ सकती है। दूसरी ओर, इस विषय पर सरकार के अंतिम निर्णय और विधानसभा में किसी प्रस्ताव या विधेयक के सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

1983 में शुरू हुआ था टासमैक का कारोबार

टासमैक की स्थापना तमिलनाडु सरकार ने 1983 में की थी। शुरुआत में इसका मुख्य काम शराब की थोक बिक्री से जुड़ा था। बाद में वर्ष 2003 में राज्य में शराब की खुदरा बिक्री का नियंत्रण भी टासमैक को सौंप दिया गया और निजी शराब दुकानों की जगह सरकारी दुकानों की व्यवस्था लागू हुई। तब से टासमैक तमिलनाडु सरकार के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है। अब ऑनलाइन आदेश, डिजिटल भुगतान और बिलिंग जैसी व्यवस्थाओं के जरिए इसकी खुदरा बिक्री प्रणाली में बदलाव की दिशा में कदम उठाया गया है।

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