WaterSharing – गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर भारत से सकारात्मक पहल की उम्मीद: बांग्लादेश
WaterSharing – बांग्लादेश ने वर्ष 1996 में भारत के साथ हुई गंगा जल संधि के नवीनीकरण को लेकर उम्मीद जताई है। ढाका का कहना है कि इस विषय पर दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है और उसे विश्वास है कि भारत इस समझौते के महत्व को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगा। हालांकि, बांग्लादेश ने यह भी स्पष्ट किया कि संधि के विस्तार से जुड़ा अंतिम फैसला भारत के स्तर पर लिया जाना है।

दोनों देशों के बीच जारी है संवाद
बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबेद इस्लाम ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि गंगा जल संधि को लेकर भारत के साथ वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार दोनों पक्ष द्विपक्षीय स्तर पर नियमित संवाद बनाए हुए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इस समझौते की उपयोगिता और दोनों देशों के साझा हितों को समझते हुए आगे की प्रक्रिया पर सकारात्मक रुख अपनाएगा।
इस वर्ष समाप्त हो रही है 30 वर्ष की संधि
भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में गंगा नदी के जल बंटवारे को लेकर 30 वर्षों के लिए समझौता किया गया था। यह संधि विशेष रूप से शुष्क मौसम में नदी के जल के उपयोग को विनियमित करने के उद्देश्य से लागू की गई थी। इसका निर्धारित कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा हो रहा है, जिससे इसके नवीनीकरण का मुद्दा दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है।
साझा नदियों के कारण बढ़ जाती है अहमियत
बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वहां लगभग 1,500 नदियां बहती हैं। इनमें से 54 प्रमुख नदियां ऐसी हैं जिनका जल भारत और बांग्लादेश दोनों साझा करते हैं। भारत इन नदियों के ऊपरी प्रवाह वाला देश है, इसलिए जल प्रबंधन और वितरण से जुड़े विषय दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
विशेषज्ञों ने भी बताया समझौते को महत्वपूर्ण
भारत में बांग्लादेश के पूर्व उच्चायुक्त तारिक ए. करीम ने हाल ही में आयोजित एक संगोष्ठी में कहा था कि 1996 की गंगा जल संधि ने यह साबित किया कि संवेदनशील मुद्दों पर भी आपसी सहयोग संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि संधि का संभावित नवीनीकरण इस बात की परीक्षा होगा कि दोनों देश बदलती जलवायु परिस्थितियों और नई जल संबंधी चुनौतियों के अनुरूप पुराने समझौतों को किस प्रकार आगे बढ़ाते हैं।
संबंधों को मजबूत बनाए रखने पर जोर
शमा ओबेद इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश को भरोसा है कि भारत गंगा नदी के जल के महत्व और दोनों देशों के साझा हितों को ध्यान में रखकर निर्णय करेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने में सहायक होगा। उनके अनुसार सरकार की ओर से गठित संबंधित टीम संधि की समयसीमा समाप्त होने से पहले भारत के साथ इस विषय पर सक्रिय रूप से काम कर रही है।
संयुक्त नदी आयोग के माध्यम से होती है चर्चा
बांग्लादेश और भारत जल बंटवारे सहित साझा नदियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संयुक्त नदी आयोग (JRC) के माध्यम से नियमित चर्चा करते हैं। इसी संस्थागत व्यवस्था के तहत दोनों देश जल संसाधनों के प्रबंधन और सहयोग से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। बांग्लादेश ने मौजूदा वार्ता के विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन उसने दोहराया है कि उसे संधि के नवीनीकरण को लेकर सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।