Primary Teacher Adjustment Scams Lucknow: शिक्षकों के समायोजन में हुआ बड़ा खेल, डीएम विशाख जी ने अपनाया कड़ा रुख
Primary Teacher Adjustment Scams Lucknow: उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया में हुई भारी धांधली और अनियमितताओं ने अब तूल पकड़ लिया है। शासन स्तर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी (डीएम) विशाख जी ने तत्काल प्रभाव से कड़ा संज्ञान लिया है। जिला प्रशासन की इस सक्रियता ने उन अधिकारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, जिन्होंने मानकों को ताक पर रखकर तबादले और समायोजन किए थे। डीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षकों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

सीडीओ की अगुवाई में जांच समिति का गठन
डीएम ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में एक विशेष जांच कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी (CDO Led Inquiry Committee) बीएसए द्वारा किए गए सभी समायोजन की फाइलों को खंगालेगी। डीएम ने बीएसए से उन सभी 170 शिक्षकों की सूची तलब की है जिनका समायोजन हाल ही में किया गया था। यह कमेटी शिक्षकों द्वारा दी गई आपत्तियों और प्रत्यावेदनों की एक-एक कर जांच करेगी और दो से तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद संशोधित सूची जारी की जाएगी।
‘हिंदुस्तान’ की खबर का बड़ा असर
समायोजन में हुए इस ‘गजब के खेल’ का खुलासा हिंदी समाचार पत्र ‘हिंदुस्तान’ ने अपनी खोजी रिपोर्टिंग के जरिए किया था। अखबार ने ‘कैंसर, लकवा रोगी व दिव्यांग शिक्षिकाओं का समायोजन’ और ’40 किमी दूर महिला शिक्षकों का तबादला’ जैसे शीर्षकों से खबर प्रकाशित कर (Media Impact on Administration) का उदाहरण पेश किया। इस खबर के छपने के बाद ही प्रशासन हरकत में आया। बता दें कि यू-डायस पोर्टल की मदद से मंगलवार को नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के बंद व एकल स्कूलों में शिक्षकों को तैनात किया गया था, जिसमें नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।
गंभीर बीमारियों से जूझ रही शिक्षिकाओं को भी नहीं बख्शा
जांच कमेटी के सामने सबसे गंभीर मुद्दा उन शिक्षिकाओं का है जो कैंसर, दिल की बीमारी और लकवा जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं। मानवीय आधार को दरकिनार करते हुए (Standard Operating Procedure Violations) के तहत इन शिक्षिकाओं को उनके घर से 25 से 40 किलोमीटर दूर दूसरे ब्लॉकों में भेज दिया गया। शारीरिक रूप से अक्षम और दिव्यांग शिक्षिकाओं के लिए इतनी लंबी दूरी तय करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इन पीड़ित शिक्षकों ने अपनी शिकायत में पुराने स्कूल में ही तैनाती देने की गुहार लगाई है।
दूरी और ब्लॉक बदलने में नियमों की अनदेखी
बीएसए कार्यालय में 50 से अधिक प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने सामूहिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि समायोजन में भौगोलिक स्थिति और विभाग के ही पुराने नियमों का पालन नहीं किया गया। शिक्षकों का कहना है कि जिस ब्लॉक या जोन में वे पहले से कार्यरत थे, वहां पद खाली होने के बावजूद जानबूझकर उनका (Arbitrary Teacher Transfers) कर उन्हें दूसरे ब्लॉकों में भेजा गया। इस अनियमितता के कारण शिक्षकों में भारी आक्रोश है और कई ने तो कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी है।
बीएसए की चुप्पी और शिक्षकों का बढ़ता आक्रोश
हैरानी की बात यह है कि जब इन गड़बड़ियों पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए बीएसए विपिन कुमार को संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। बीएसए की इस चुप्पी ने भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की आशंकाओं को और अधिक हवा दे दी है। शिक्षकों का आरोप है कि (Transparency in Education Department) पूरी तरह से खत्म हो चुकी है और पोर्टल के नाम पर मनचाहे ढंग से सूचियां बनाई गई हैं।
भविष्य की रणनीति: संशोधित सूची का इंतजार
अब सबकी नजरें सीडीओ की रिपोर्ट और डीएम की संस्तुति पर टिकी हैं। शिक्षकों को उम्मीद है कि प्रशासन मानवीय पहलुओं और नियमों को ध्यान में रखते हुए (Revised Teacher Adjustment List) जारी करेगा। यदि दो-तीन दिन के भीतर त्रुटियों में सुधार नहीं किया गया, तो शिक्षक संगठनों ने बड़े आंदोलन और विधिक कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर ली है। फिलहाल, जांच कमेटी तेजी से काम कर रही है ताकि प्रभावित शिक्षकों को न्याय मिल सके।