उत्तर प्रदेश

Widow Pension Scheme Scam: बड़ा खुलासा! सुहाग मिलने के बाद भी सरकारी खजाने पर डाका डाल रही थीं ये महिलाएं…

Widow Pension Scheme Scam: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है जिसने प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया है। सरकारी फाइलों में जो महिलाएं बेसहारा और विधवा दर्ज थीं, असल जिंदगी में वे दोबारा अपना घर बसा चुकी थीं। यह जालसाजी तब सामने आई जब (Social Welfare Department) ने लाभार्थियों का जमीनी सत्यापन शुरू किया। इस जांच में पाया गया कि जीवन का नया सफर शुरू करने के बावजूद ये महिलाएं सरकार की आंखों में धूल झोंककर पेंशन की राशि हड़प रही थीं।

Widow Pension Scheme Scam
Widow Pension Scheme Scam

सत्यापन की आंच में पिघल गए झूठ के पहाड़

जिला प्रोबेशन विभाग द्वारा की गई इस कड़ी जांच में एक-एक कर उन चेहरों से नकाब उतर गया जो अपात्र होने के बाद भी लाभ ले रहे थे। जिले में वर्तमान में कुल 73,436 विधवा महिलाएं पेंशन प्राप्त कर रही हैं, लेकिन (Government Pension Audit) के दौरान 33 ऐसी महिलाएं मिलीं जो कानूनी और नैतिक रूप से इस लाभ की हकदार नहीं बची थीं। जैसे ही यह जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, विभाग ने तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाने के निर्देश जारी कर दिए।

तहसीलों से जुटाए गए जालसाजी के पक्के सबूत

विभाग ने जब ब्लॉकवार आंकड़े जुटाए, तो पता चला कि यह फर्जीवाड़ा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। बिल्हौर, बिधनू और पतारा जैसे इलाकों में (Pension Eligibility Verification) के दौरान छह-छह ऐसे मामले सामने आए जहां महिलाएं पुनर्विवाह कर चुकी थीं। इसके अलावा कल्याणपुर, घाटमपुर, शिवराजपुर और सरसौल में भी ऐसी महिलाओं की पहचान हुई जो अपने नए वैवाहिक जीवन के साथ-साथ पुरानी विधवा पेंशन का लुत्फ उठा रही थीं।

दोषियों से होगी सरकारी धन की पाई-पाई की वसूली

जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है और स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने न केवल इन 33 महिलाओं के नाम लाभार्थियों की सूची से हटा दिए हैं, बल्कि (Revenue Recovery Process) के तहत अब तक दी गई कुल राशि को वापस सरकारी खजाने में जमा करने के आदेश भी दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि सरकारी योजनाएं केवल जरूरतमंदों के लिए हैं और धोखेबाजों के खिलाफ यह कार्रवाई एक मिसाल पेश करेगी।

आवास विकास परिषद में करोड़ों के घोटाले की गूंज

कानपुर के इस पेंशन घोटाले के साथ-साथ आवास विकास परिषद में भी भ्रष्टाचार का एक बहुत बड़ा ज्वालामुखी फटा है। विभाग ने करीब 50 से अधिक रिटायर अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ कठोर (Legal Action Against Corruption) को मंजूरी दे दी है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने पद पर रहते हुए नियमों को ताक पर रखकर सरकारी संपत्ति और धन का दुरुपयोग किया। अब प्रशासन इन सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारियों की पेंशन से कटौती करके नुकसान की भरपाई करने की तैयारी में है।

बिना भुगतान किए वापस कर दिए गए करोड़ों रुपये

इस घोटाले की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले एक ही प्रकरण में 5.87 करोड़ रुपये का गबन किया गया था। जांच में पाया गया कि कुछ रसूखदार इंजीनियरों ने एक प्रॉपर्टी डीलर को फायदा पहुंचाने के लिए बिना किसी (Financial Security Deposit) के ही करोड़ों की मोटी रकम उसे वापस लौटा दी थी। इस गड़बड़ी ने विभाग को भारी वित्तीय क्षति पहुंचाई, जिसकी जवाबदेही अब उन दोषी अधिकारियों पर तय की गई है जो अब चैन की नींद सो रहे थे।

रिटायरमेंट के बाद भी नहीं बच पाएंगे भ्रष्ट अधिकारी

आवास विकास बोर्ड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में रिटायरमेंट कोई कवच नहीं है। बोर्ड ने आदेश दिया है कि जिन अधिकारियों की संलिप्तता (Embezzlement of Funds) में पाई गई है, उनकी पेंशन से 50 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी ताकि घोटाले की रकम वसूल की जा सके। यह फैसला उन सभी कर्मचारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाकर अपनी जेबें भरने का काम करते हैं।

भविष्य में निगरानी के लिए प्रशासन की नई रणनीति

कानपुर की इन घटनाओं ने सरकारी सिस्टम की खामियों को उजागर किया है, जिसे सुधारने के लिए जिला प्रशासन अब नई तकनीक और नियमित निगरानी का सहारा ले रहा है। भविष्य में (Digital Identity Tracking) जैसे माध्यमों का उपयोग किया जाएगा ताकि विवाह पंजीकरण और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे डेटा को पेंशन पोर्टल से जोड़ा जा सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी महिला के दोबारा शादी करते ही उसका नाम विधवा पेंशन की श्रेणी से स्वतः बाहर हो जाए और सरकारी धन का दुरुपयोग रुक सके।

 

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