ForestFireControl – नैनीताल में वनाग्नि रोकने को 10 हजार पेड़ हटाने की तैयारी
ForestFireControl – उत्तराखंड के नैनीताल वन प्रभाग में गर्मियों के दौरान बढ़ने वाली वनाग्नि की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने एक व्यापक योजना पर काम शुरू किया है। इसके तहत जंगलों के भीतर बनी फायर लाइन को फिर से प्रभावी बनाने के लिए करीब 10 हजार पेड़ों को हटाने का निर्णय लिया गया है। विभाग का मानना है कि यह कदम आग को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में फैलने से रोकने में मददगार साबित होगा। यह पूरा अभियान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, ताकि पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहे और सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत हो।

फायर लाइन की सफाई पर विशेष जोर
नैनीताल वन प्रभाग लगभग 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे आठ अलग-अलग रेंजों में विभाजित किया गया है। यहां हर साल गर्मियों में सूखी पत्तियों और कम होती नमी के कारण आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। खासतौर पर चीड़ के पेड़ों से गिरने वाली पत्तियां आग को तेजी से फैलाने में भूमिका निभाती हैं। ऐसे में फायर लाइन, यानी जंगल के बीच बनाई गई खाली पट्टी, आग को रोकने का एक अहम साधन बनती है। इन लाइनों की नियमित सफाई न होने से उनकी उपयोगिता कम हो गई थी, जिसे अब फिर से दुरुस्त करने की कोशिश की जा रही है।
लंबे समय से उपेक्षित रही थीं फायर लाइनें
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में फायर लाइन के भीतर नए पेड़-पौधे उग आए थे, जिससे ये पट्टियां प्रभावहीन हो गई थीं। अब इन्हें दोबारा साफ करने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत 440 किलोमीटर लंबी फायर लाइन को चिह्नित किया गया है और इस दायरे में आने वाले पेड़ों को हटाने की योजना बनाई गई है। शुरुआती चरण में 47 लॉट तैयार किए गए हैं, जिनमें से 12 लॉट को कटान के लिए वन निगम को सौंपा जा चुका है।
वैज्ञानिक तरीके से आग पर नियंत्रण की कोशिश
विशेषज्ञों का कहना है कि फायर लाइन कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि यह जंगलों को आग से बचाने का एक स्थापित और वैज्ञानिक तरीका है। इस पद्धति में जंगल के भीतर एक निश्चित चौड़ाई में पेड़-पौधे और सूखी सामग्री हटा दी जाती है, जिससे आग को आगे बढ़ने के लिए ईंधन नहीं मिलता। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां गर्मियों में तापमान बढ़ जाता है और नमी कम हो जाती है, वहां यह तरीका काफी कारगर साबित होता है। इससे आग सीमित दायरे में ही रुक जाती है और उसे काबू में करना आसान हो जाता है।
अन्य राज्यों में भी अपनाया जाता रहा है तरीका
भारत के कई राज्यों में फायर लाइन की यह प्रणाली पहले से लागू है। Forest Survey of India और विभिन्न राज्य वन विभाग समय-समय पर इस तकनीक का उपयोग करते रहे हैं। उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी हर साल फायर सीजन से पहले इन लाइनों की सफाई और चौड़ीकरण किया जाता है। इससे न केवल आग पर नियंत्रण आसान होता है, बल्कि जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
पर्यावरण और सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी
वन विभाग के लिए यह चुनौती भी है कि पेड़ों की कटाई करते समय पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित न हो। अधिकारियों का कहना है कि केवल उन्हीं पेड़ों को हटाया जाएगा, जो फायर लाइन के दायरे में आते हैं और जिनसे आग फैलने का खतरा बढ़ता है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि संरक्षण और सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बना रहे।