Recruitment – उत्तराखंड में नर्स भर्ती विवाद गहराया, प्रदर्शन के दौरान चार अभ्यर्थियों ने पिया फिनायल
Recruitment– उत्तराखंड में वर्षवार नर्स भर्ती की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन बुधवार को उस समय गंभीर मोड़ पर पहुंच गया, जब स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के आवास पर हुई वार्ता बेनतीजा रहने के बाद चार महिला अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर फिनायल पी लिया। इनमें एक अभ्यर्थी की तबीयत अधिक बिगड़ने पर उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आंदोलन ने नया रूप ले लिया।

मंत्री आवास पर हुई वार्ता नहीं पहुंची किसी निष्कर्ष पर
जानकारी के अनुसार, नर्सिंग अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर बुधवार सुबह स्वास्थ्य मंत्री के आवास पहुंचे और प्रदर्शन किया। पुलिस की मौजूदगी में नर्सिंग एकता मंच के प्रतिनिधियों ने मंत्री से मुलाकात कर वर्षवार भर्ती व्यवस्था बहाल करने और 25-26 जुलाई को प्रस्तावित लिखित परीक्षा रद्द करने की मांग रखी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बातचीत के दौरान उनकी मांगों पर सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई।
चार महिला अभ्यर्थियों ने उठाया आत्मघाती कदम
प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों का आरोप है कि वार्ता विफल होने के बाद चार महिला अभ्यर्थियों ने विरोध स्वरूप फिनायल पीने का प्रयास किया। चिन्यालीसौड़ की रहने वाली किरण रावत की हालत अधिक गंभीर बताई गई, जिन्हें पहले एक निजी अस्पताल और बाद में दून अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। अन्य तीन अभ्यर्थियों लीला, अन्नू और किरण ने भी फिनायल पीने की कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस के हस्तक्षेप के कारण स्थिति और गंभीर नहीं हो सकी।
कांग्रेस नेता को भी पुलिस ने हिरासत में लिया
घटना की सूचना मिलने के बाद कांग्रेस नेता ज्योति रौतेला भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं। पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।
सफाई कर्मचारियों का सचिवालय मार्च भी रोका गया
इसी दिन राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी मजदूर यूनियन से जुड़े कर्मचारियों ने भी अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर सचिवालय कूच का प्रयास किया। देहरादून नगर निगम और आसपास के निकायों के कर्मचारी पहले नगर निगम परिसर में एकत्र हुए और वहां धरना दिया। इसके बाद सचिवालय की ओर बढ़ते समय पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद कर्मचारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यूनियन के प्रदेश संरक्षक चौधरी नरेश वैध ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर शासनादेश जारी नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पर्यावरण मित्रों के लिए बढ़ा हुआ दैनिक वेतन, रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, समान कार्य के लिए समान वेतन, अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण और मृतक आश्रित नियमों में संशोधन शामिल हैं।