SITProbe – चंपावत नाबालिग मामले में पुलिस जांच से सामने आए नए तथ्य
SITProbe – उत्तराखंड के चंपावत जिले में चर्चित नाबालिग मामले ने गुरुवार को नया मोड़ ले लिया। पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर दावा किया है कि कथित गैंगरेप की कहानी आपसी रंजिश के चलते विरोधियों को फंसाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। इस मामले में पहले तीन लोगों के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन अब जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिनसे घटना को लेकर पुलिस का रुख बदल गया है।

चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने प्रेस वार्ता में बताया कि पीड़िता के पिता की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम गठित की गई और सभी पहलुओं की विस्तृत जांच शुरू की गई।
10 सदस्यीय एसआईटी ने संभाली जांच
पुलिस के अनुसार मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस क्षेत्राधिकारी की निगरानी में 10 सदस्यीय एसआईटी बनाई गई। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से साक्ष्य जुटाए।
जांच के दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके साथ ही बाल कल्याण समिति के समक्ष काउंसिलिंग और न्यायालय में बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया भी पूरी की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच को तकनीकी और वैज्ञानिक आधार पर आगे बढ़ाया गया है।
शादी समारोह में शामिल होने गई थी किशोरी
जांच के दौरान पुलिस को यह जानकारी मिली कि कथित घटना वाले दिन किशोरी अपनी इच्छा से एक परिचित की शादी में शामिल होने गई थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर उसकी गतिविधियों की पुष्टि करने का दावा किया है।
अधिकारियों के अनुसार तकनीकी जांच से यह स्पष्ट हुआ कि पीड़िता विभिन्न स्थानों पर सामान्य रूप से आती-जाती रही। पुलिस ने कहा कि अब तक मिले इलेक्ट्रॉनिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य कथित आरोपों से मेल नहीं खाते।
मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिले जबरदस्ती के संकेत
पुलिस का कहना है कि मेडिकल परीक्षण के दौरान किसी तरह की गंभीर चोट या संघर्ष के संकेत सामने नहीं आए। अधिकारियों के अनुसार जांच में कुछ गवाहों के बयान भी तकनीकी साक्ष्यों से मेल खाते नहीं पाए गए।
पुलिस ने यह भी बताया कि जांच के दौरान कुछ लोगों के बीच लगातार संपर्क और बातचीत के संकेत मिले हैं। पुलिस का दावा है कि यह पूरा घटनाक्रम सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है। हालांकि जांच एजेंसियां अभी सभी तथ्यों का सत्यापन कर रही हैं।
नामजद आरोपी घटनास्थल पर नहीं थे
जांच में शामिल अधिकारियों के मुताबिक जिन तीन लोगों को नामजद किया गया था, वे कथित घटना के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। पुलिस ने कहा कि तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उनकी लोकेशन अलग स्थानों पर पाई गई है।
एसपी रेखा यादव ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य मामले की निष्पक्ष जांच करना है ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी ने झूठी या भ्रामक जानकारी देकर मामला दर्ज कराया है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अफवाहों से बचने की अपील
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करने और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखने की अपील की है।
पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की बारीकी से जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों ने दोहराया कि संवेदनशील मामलों में तथ्य सामने आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होता।