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FreeTradeAgreement – भारत और GCC के बीच FTA वार्ता दोबारा शुरू करने की तैयारी

FreeTradeAgreement – केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को संकेत दिए कि भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच लंबे समय से अटकी मुक्त व्यापार समझौता वार्ता को फिर से आगे बढ़ाया जाएगा। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भारत हाल के महीनों में यूरोपीय संघ और संयुक्त अरब अमीरात के साथ अहम व्यापारिक समझौतों को अंतिम रूप दे चुका है। सरकार का मानना है कि GCC के साथ आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने से भारत के निर्यात, निवेश और सेवाक्षेत्र को व्यापक लाभ मिल सकता है।

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छह खाड़ी देशों के साथ ऐतिहासिक कारोबारी रिश्ते

GCC में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारत और इन देशों के बीच व्यापारिक संपर्क कोई नई बात नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें हजारों वर्ष पुरानी हैं। मौजूदा समय में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक इन खाड़ी देशों में रहकर न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा हैं, बल्कि भारत के लिए रेमिटेंस और व्यापार के मजबूत सेतु भी बने हुए हैं। प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही को सरल बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और व्यापार से जुड़ी नीतियों में स्पष्टता लाना है।

क्षेत्रीय भू-राजनीति के बीच वार्ता की वापसी

भारत और GCC के बीच यह संवाद ऐसे दौर में पुनः शुरू हो रहा है जब पश्चिम एशिया की राजनीति जटिल मोड़ पर है। सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते ने क्षेत्रीय संतुलन पर ध्यान खींचा था। यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव के कुछ समय बाद सामने आया, जिसकी पृष्ठभूमि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारत की जवाबी कार्रवाई से जुड़ी रही।

पाकिस्तान-सऊदी समझौते का अप्रत्यक्ष असर

विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान की बढ़ती सामरिक नजदीकी ने खाड़ी क्षेत्र में नए समीकरण बनाए हैं। हालांकि भारत और GCC के आर्थिक हित इससे अलग रखे गए हैं, लेकिन इन घटनाओं ने क्षेत्रीय साझेदारियों को अधिक सतर्क और रणनीतिक बना दिया है। इसी संदर्भ में भारत का GCC के साथ व्यापारिक संवाद दोबारा शुरू करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

UAE और पाकिस्तान संबंधों में दिखी ठंडक

जहां एक ओर पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्ते मजबूत होते दिखे, वहीं दूसरी ओर संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान के बीच दूरी बढ़ने के संकेत मिले हैं। UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के कुछ समय बाद ही पाकिस्तान के साथ इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रबंधन से जुड़ा एक बड़ा समझौता स्थगित कर दिया गया। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय साझेदार को अंतिम रूप न दे पाने के कारण यह फैसला लिया गया।

रणनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव के संकेत

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के बाद UAE और पाकिस्तान के रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं रही। इसके विपरीत, भारत और UAE के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। हालिया दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेतृत्व ने संबंधों को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई।

भारत-UAE व्यापारिक लक्ष्य और खाड़ी की दिशा

UAE के राष्ट्रपति की संक्षिप्त लेकिन अहम भारत यात्रा के बाद दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में UAE और सऊदी अरब भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि सऊदी अरब की पाकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी और UAE की भारत के साथ बढ़ती निकटता खाड़ी देशों की बदलती प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

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