FuelPrices – कच्चा तेल महंगा, फिर भी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर
FuelPrices – अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। 30 मार्च की सुबह जारी ताजा दरों के अनुसार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और भारत पेट्रोलियम ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए कीमतें स्थिर रखी हैं। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। वहीं, प्रीमियम ईंधन XP95 और XG डीजल की कीमतें क्रमशः 101.89 और 91.49 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई हैं। देश में सबसे सस्ता ईंधन पोर्ट ब्लेयर में मिल रहा है, जहां पेट्रोल 82.46 रुपये और डीजल 78.05 रुपये प्रति लीटर है।

वैश्विक तनाव से कच्चे तेल में तेज उछाल
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। हालात उस समय और गंभीर हो गए जब यमन के हूती विद्रोही भी इस संघर्ष में शामिल हो गए और अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 3 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 116.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो इस महीने का उच्चतम स्तर माना जा रहा है।
संघर्ष का दायरा बढ़ा, क्षेत्रीय अस्थिरता गहरी
ताजा घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि यह संघर्ष अब सीमित दायरे में नहीं रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं और चेतावनी दी है कि जब तक ईरान और उसके सहयोगियों पर कार्रवाई जारी रहेगी, वे अपने हमले नहीं रोकेंगे। इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ रहा है।
तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा
हालांकि अभी तक समुद्री मार्गों को सीधे निशाना नहीं बनाया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रेड सी और बाब-अल-मंदेब जैसे अहम मार्ग जोखिम में आ सकते हैं। अगर इन क्षेत्रों में व्यवधान होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। सऊदी अरब का यनबू पोर्ट, जो पहले से ही एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल हो रहा है, भी संभावित खतरे के दायरे में बताया जा रहा है।
मार्च में रिकॉर्ड तेजी, बाजार में बढ़ी चिंता
मार्च महीने के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते टकराव ने ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। फिलहाल किसी ठोस समाधान के संकेत नहीं मिल रहे हैं, जिससे निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों में चिंता बनी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का असर
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बढ़ाने की खबरों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जानकारी के अनुसार, यहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी गई है और केवल कुछ देशों को ही अनुमति दी जा रही है। इससे सप्लाई चेन पर दबाव और बढ़ सकता है।
आगे बढ़ सकती हैं कीमतें, विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात और बिगड़ते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा, जहां पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत जरूर है, लेकिन आने वाले समय में स्थिति बदल सकती है।