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BRICS Summit – भारत-चीन संबंधों में नरमी के बीच शी जिनपिंग के दौरे की संभावना

BRICS Summit – साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में जो ठहराव आ गया था, अब उसमें धीरे-धीरे बदलाव दिखाई देने लगा है। हाल के कूटनीतिक संकेत बताते हैं कि दोनों देश फिर से संवाद की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में यह संभावना मजबूत हो रही है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस वर्ष भारत में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह गलवान घटना के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा और इसे दोनों देशों के संबंधों में एक अहम मोड़ माना जाएगा।

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ब्रिक्स मंच पर बढ़ती सक्रियता

भारत इस समय ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है और इस मंच के जरिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिशें तेज हुई हैं। चीन ने सार्वजनिक रूप से भारत की इस भूमिका का समर्थन किया है। दोनों देशों के बीच आधिकारिक स्तर पर लगातार बातचीत जारी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मतभेदों के बावजूद बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बनाए रखने की इच्छा बनी हुई है।

नई दिल्ली में चीनी दूत की मौजूदगी

पिछले सप्ताह चीन के विशेष दूत झाई जुन नई दिल्ली आए थे, जहां उन्होंने पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर आयोजित एक बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उनकी मुलाकात विदेश मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी नीना मल्होत्रा से भी हुई। बातचीत के दौरान झाई जुन ने कहा कि भारत और चीन जैसे बड़े विकासशील देश अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर संवाद बनाए रखने में हमेशा सक्रिय रहे हैं।

भारत की भूमिका को चीन का समर्थन

चीनी पक्ष ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को सकारात्मक नजरिए से देखा है। झाई जुन ने कहा कि भारत इस समय जिस तरह से नेतृत्व कर रहा है, वह महत्वपूर्ण है और इससे क्षेत्रीय मुद्दों पर ठोस संदेश देने में मदद मिल सकती है। खासकर पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए ब्रिक्स देशों की भूमिका अहम मानी जा रही है।

भारत का संतुलित रुख

भारत की ओर से भी सहयोग का संकेत दिया गया है। नीना मल्होत्रा ने कहा कि भारत, चीन सहित सभी ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय तनाव कम करने और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए तैयार है। यह बयान दर्शाता है कि भारत बहुपक्षीय मंचों पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाए हुए है।

संभावित उच्चस्तरीय दौरे

आने वाले समय में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के भारत दौरे की भी संभावना जताई जा रही है, जो ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से जुड़ा होगा। इसके अलावा सबसे अहम चर्चा शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे को लेकर है। इससे पहले रूस में हुई बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच बातचीत में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को लेकर समर्थन व्यक्त किया गया था।

कैसे बनी इस कूटनीतिक पहल की पृष्ठभूमि

भारत और चीन के बीच यह नरमी अचानक नहीं आई है। अक्टूबर 2024 में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था, जिसने तनाव कम करने में भूमिका निभाई। इसके बाद रूस के कजान में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई, जो गलवान के बाद पहली औपचारिक वार्ता थी। फिर 2025 में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग को भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया।

ब्रिक्स के जरिए संवाद की रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स जैसे मंच भारत और चीन को सीधे द्विपक्षीय विवादों से हटकर व्यापक वैश्विक मुद्दों पर साथ काम करने का अवसर देते हैं। बदलते वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच दोनों देश अपने हितों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं। चीन जहां आर्थिक चुनौतियों के बीच बड़े बाजारों के साथ संबंध सुधारना चाहता है, वहीं भारत सीमा पर शांति बनाए रखते हुए विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है।

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