JahangirKhan – फलता में पुलिस कार्रवाई के बीच फिर चर्चा में टीएमसी नेता
JahangirKhan – पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फलता क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेता जहांगीर खान, जिन्हें स्थानीय स्तर पर ‘पुष्पा’ के नाम से भी जाना जाता है, एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। पुलिस ने उन्हें जांच प्रक्रिया के तहत इलाके की विभिन्न सड़कों पर ले जाकर घटनास्थलों का निरीक्षण कराया। इस दौरान उनकी सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो रहे हैं।

जांच के दौरान सार्वजनिक रूप से ले जाया गया
सामने आए वीडियो में जहांगीर खान पुलिस घेरे के बीच चलते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अधिकारियों की निगरानी में उन्हें फलता के विभिन्न हिस्सों में ले जाया गया। स्थानीय लोगों की मौजूदगी के बीच खान को हाथ जोड़ते हुए भी देखा गया। यह कार्रवाई उस जांच का हिस्सा बताई जा रही है, जो चुनाव बाद हुई हिंसा और अन्य आरोपों से संबंधित मामलों में चल रही है।
इससे पहले भी हुई थी ऐसी कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, 11 जून को भी पुलिस ने उन्हें इसी तरह इलाके के कुछ स्थानों पर ले जाकर घटनाओं से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने की कोशिश की थी। उस समय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी में सहारारहाट समेत कई क्षेत्रों का दौरा कराया गया था। अधिकारियों का कहना था कि यह प्रक्रिया जांच को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक थी।
नेपाल सीमा के पास हुई थी गिरफ्तारी
जहांगीर खान को 8 जून को राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने नेपाल सीमा के नजदीक से गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों को आशंका थी कि वह राज्य से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। चुनाव परिणाम आने के बाद से उनके सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आने के कारण भी पुलिस उनकी तलाश कर रही थी।
चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप
खान पर चुनाव से पहले कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायतों में कहा गया था कि उन्होंने मतदान प्रक्रिया से जुड़े कुछ अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास किया था। आरोप यह भी थे कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अनियमितताएं हुई थीं। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
विधानसभा चुनाव के दौरान बढ़ी थी चर्चा
फलता विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल के दौरान जहांगीर खान का नाम लगातार चर्चा में रहा था। विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों की ओर से उन पर क्षेत्र में प्रभाव और दबाव का वातावरण बनाने के आरोप लगाए गए थे। बढ़ती शिकायतों के बीच चुनाव आयोग ने स्थिति की निगरानी के लिए विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त किया था।
चुनाव आयोग की निगरानी में रहे थे घटनाक्रम
पूर्व पुलिस अधिकारी अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में क्षेत्र में भेजा गया था। अपने दौरे के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से दूर रहने की चेतावनी दी थी। उस समय चुनाव आयोग ने क्षेत्र में मतदान से जुड़े कई मामलों पर कड़ी नजर रखी थी।
मतदान के दौरान भी सामने आए थे विवाद
फलता सीट पर मतदान के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को लेकर भी विवाद सामने आए थे। कुछ मतदान केंद्रों से शिकायतें मिलने के बाद चुनाव आयोग ने जांच कराई और चुनिंदा बूथों पर पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया था। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को राज्य की प्रमुख राजनीतिक चर्चाओं में शामिल कर दिया था।
चुनाव से पहले पीछे हटे थे जहांगीर खान
राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ने के बीच जहांगीर खान ने मतदान से कुछ दिन पहले चुनावी मैदान से हटने की घोषणा की थी। इसके बाद वह सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर हो गए थे। बाद में उन्होंने कानूनी राहत के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाया। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।