JauharUniversity – ध्वस्तीकरण आदेश पर सियासत तेज, कांग्रेस सांसद ने उठाए सवाल
JauharUniversity- रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर जारी ध्वस्तीकरण आदेश के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी पहले से ही प्रशासन की कार्रवाई का विरोध कर रही है, वहीं अब कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस मामले में सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भवन का मानचित्र स्वीकृत न होने के आधार पर कार्रवाई की जा रही है, तो ऐसे मामलों में समान नियम सभी संस्थानों पर लागू होने चाहिए।

कांग्रेस सांसद ने प्रशासनिक कार्रवाई पर उठाए सवाल
इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि जब जौहर विश्वविद्यालय का निर्माण शुरू हुआ था, उस समय यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। उनके अनुसार बाद में प्राधिकरण का दायरा बढ़ाया गया। उन्होंने सवाल किया कि यदि अब मानचित्र स्वीकृति को आधार बनाकर कार्रवाई की जा रही है, तो इसी कसौटी पर अन्य सरकारी और निजी संस्थानों की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
शिक्षा संस्थान को लेकर जताई चिंता
कांग्रेस सांसद ने कहा कि किसी बड़े शैक्षणिक संस्थान से जुड़े मामले में निर्णय लेते समय सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा संस्थानों के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और समान मानकों का पालन आवश्यक है।
क्या है रामपुर विकास प्राधिकरण का आदेश
रामपुर विकास प्राधिकरण ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बने 38 भवनों के संबंध में ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि इन भवनों का निर्माण आवश्यक मानचित्र स्वीकृति के बिना किया गया, इसलिए उन्हें अवैध निर्माण की श्रेणी में रखा गया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर स्वयं कार्रवाई करने को कहा गया है। आदेश में यह भी उल्लेख है कि निर्धारित समय सीमा में ऐसा नहीं होने पर प्राधिकरण नियमानुसार ध्वस्तीकरण करेगा और संबंधित खर्च की वसूली भी की जाएगी।
सड़क को लेकर पहले भी हुई थी कार्रवाई
इससे पहले प्रशासन ने जौहर विश्वविद्यालय परिसर से जुड़े लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग को सार्वजनिक उपयोग के लिए मुक्त कराया था। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर इसे आम रास्ता बताते हुए आवश्यक सूचना पट्ट भी लगाए थे। यह सड़क पूर्व में विश्वविद्यालय परिसर के मुख्य प्रवेश मार्ग से होकर गुजरती थी।
अग्नि सुरक्षा मानकों पर भी नोटिस
जौहर विश्वविद्यालय को हाल ही में अग्निशमन विभाग की ओर से भी अंतिम नोटिस जारी किया गया है। विभाग के अनुसार निरीक्षण के दौरान अग्नि सुरक्षा से जुड़े कुछ मानकों में कमियां पाई गईं। विश्वविद्यालय प्रशासन को सात दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने और नोटिस का जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मामला बना राजनीतिक चर्चा का विषय
जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े प्रशासनिक फैसलों पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। एक ओर प्रशासन अपनी कार्रवाई को नियमानुसार बता रहा है, वहीं विपक्षी दल इस पर सवाल उठा रहे हैं। अब इस पूरे मामले पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।