ElectionSecurity – चुनावी हस्तक्षेप को लेकर ट्रंप का नया दावा, अमेरिका में तेज हुई बहस
ElectionSecurity- अमेरिका में चुनावी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उनके पास ऐसे संवेदनशील दस्तावेज हैं, जो इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने ला सकते हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों की तैयारियां चल रही हैं और राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी सक्रिय है। हालांकि, उनके दावे को लेकर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

ट्रंप ने खुफिया दस्तावेजों का किया उल्लेख
करीब 25 मिनट के अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि कुछ गोपनीय सूचनाएं सार्वजनिक किए जाने के बाद यह स्पष्ट होगा कि चीन ने अमेरिकी मतदाताओं से जुड़ा बड़ा डेटा अवैध तरीके से हासिल किया था। उनके अनुसार, कथित रूप से प्राप्त इस जानकारी में करोड़ों मतदाताओं के नाम, पते और वोटर पंजीकरण से जुड़े अन्य विवरण शामिल थे। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित खुफिया तंत्र के कुछ अधिकारियों ने इस मामले से जुड़ी सूचनाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया और उन्हें सार्वजनिक होने से रोका।
हालांकि, इससे पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अपनी रिपोर्ट में कह चुकी हैं कि वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में चीन की ओर से हस्तक्षेप के ठोस प्रमाण नहीं मिले थे। ऐसे में ट्रंप का नया दावा आधिकारिक आकलन से अलग माना जा रहा है।
चीन ने आरोपों को किया खारिज
ट्रंप के बयान के बाद चीन की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। अमेरिका स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू चांग ने कहा कि चीन ने कभी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप नहीं किया और भविष्य में भी ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बयानबाजी बढ़ती है तो हाल के महीनों में व्यापार और कूटनीतिक संबंधों में आई नरमी पर भी असर पड़ सकता है। इससे पहले दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने के प्रयास किए गए थे।
डेमोक्रेटिक नेताओं ने उठाए सवाल
ट्रंप के दावों पर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी आपत्ति जताई है। हाउस परमानेंट सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस से जुड़े डेमोक्रेटिक सदस्यों ने कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बिल पुल्टे समेत FBI, CIA और NSA के प्रमुखों को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि खुफिया सूचनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए न होने दिया जाए।
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने भी आरोप लगाया कि चुनावी सुरक्षा से जुड़े अपुष्ट दावों का उपयोग राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।
चुनावी नियमों को लेकर जारी है बहस
राष्ट्रपति पद पर वापसी के बाद ट्रंप प्रशासन चुनावी प्रक्रिया में बदलाव से जुड़े कई प्रस्तावों पर जोर देता रहा है। इनमें ‘Save America Act’ भी शामिल है। प्रस्तावित कानून के तहत मतदान के लिए फोटो पहचान पत्र और मतदाता पंजीकरण के समय अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य करने का प्रावधान रखा गया है। साथ ही राज्यों से मतदाता पंजीकरण संबंधी जानकारी संघीय सरकार के साथ साझा करने की व्यवस्था का भी प्रस्ताव है।
दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक नेताओं और मतदान अधिकार से जुड़े कई संगठनों का कहना है कि चुनावी धोखाधड़ी के मामले बहुत कम सामने आते हैं। उनके अनुसार, ऐसे कड़े प्रावधान कुछ पात्र मतदाताओं के लिए मतदान प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं। फिलहाल चुनावी सुरक्षा और मतदाता पहचान से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका में राजनीतिक बहस लगातार जारी है।