बिहार

LandAcquisition – बिहार में जमीन खरीद प्रक्रिया के लिए लागू हुई नई समिति व्यवस्था

LandAcquisition – बिहार सरकार ने सार्वजनिक हित और विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने की दिशा में नया कदम उठाया है। अब विभिन्न सरकारी परियोजनाओं के लिए आवश्यक निजी भूमि की खरीद और अधिग्रहण संबंधी मामलों का निर्णय निर्धारित समितियों के माध्यम से किया जाएगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इसके लिए नई व्यवस्था लागू करते हुए अलग-अलग स्तर पर समितियों का गठन किया है।

bihar land acquisition policy 2026

सरकार का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाना और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी को कम करना है। नई व्यवस्था के तहत परियोजना की अनुमानित भूमि लागत के आधार पर निर्णय लेने का अधिकार जिला और प्रमंडल स्तर की समितियों को दिया गया है।

लागत के आधार पर तय होगी समिति की भूमिका

जारी प्रावधानों के अनुसार, जिन परियोजनाओं के लिए भूमि खरीद की अनुमानित लागत 100 करोड़ रुपये तक होगी, उनके मामलों का निपटारा जिलास्तरीय समिति करेगी। इस समिति की अध्यक्षता संबंधित जिले के जिलाधिकारी करेंगे। वहीं 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाली भूमि खरीद से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा प्रमंडलीय स्तर की समिति करेगी, जिसकी अगुवाई प्रमंडलीय आयुक्त करेंगे।

सरकार का मानना है कि इससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी और विभिन्न विकास कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जा सकेंगे।

नई भूमि खरीद नीति लागू

राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 को लागू किया है। इस नीति के तहत सरकारी विभागों और निकायों को विकास योजनाओं के लिए आवश्यक निजी भूमि, संबंधित भूमि मालिकों की सहमति से खरीदने की सुविधा मिलेगी।

विभाग के अनुसार, यह व्यवस्था पारंपरिक अधिग्रहण प्रक्रिया की तुलना में कम समय लेने वाली होगी और इससे प्रशासनिक खर्च में भी कमी आएगी। साथ ही परियोजनाओं को समय पर शुरू करने और पूरा करने में मदद मिलेगी।

जिलास्तरीय समिति में शामिल होंगे कई अधिकारी

100 करोड़ रुपये तक की भूमि खरीद से जुड़े मामलों के लिए गठित जिलास्तरीय समिति में कई विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। जिलाधिकारी इसके अध्यक्ष होंगे, जबकि उप विकास आयुक्त, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, कृषि या वन विभाग के अधिकारी, जिला अवर निबंधक और संबंधित निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।

जिस विभाग या संस्था के लिए भूमि खरीदी जानी होगी, उसका नामित अधिकारी समिति में सदस्य सचिव की जिम्मेदारी निभाएगा। समिति को भूमि खरीद संबंधी प्रस्ताव एक माह के भीतर तैयार कर आगे की प्रक्रिया के लिए भेजना होगा।

प्रमंडलीय स्तर पर होगी बड़े मामलों की समीक्षा

जिन परियोजनाओं में भूमि खरीद की लागत 100 करोड़ रुपये से अधिक होगी, उनके लिए प्रमंडलीय स्तर पर अलग समिति बनाई गई है। इस समिति के अध्यक्ष प्रमंडलीय आयुक्त होंगे। इसके अलावा संबंधित जिलों के समाहर्ता, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी, अवर निबंधक तथा निर्माण कार्यों से जुड़े अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।

समिति परियोजना से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा कर निर्धारित समय के भीतर संबंधित विभाग को अपनी अनुशंसा भेजेगी, ताकि आगे की कार्रवाई शीघ्रता से पूरी की जा सके।

विकास परियोजनाओं को मिलेगी गति

राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से सड़क, भवन, आधारभूत संरचना और अन्य जनोपयोगी परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। भूमि संबंधी मामलों में समय की बचत होने से विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शी प्रक्रिया और स्पष्ट जिम्मेदारियों के कारण परियोजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सकेगा। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

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