Revenue – बिहार विधानसभा में दाखिल-खारिज शुल्क समेत पेश हुए कई संशोधन विधेयक
Revenue– बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य सरकार ने प्रशासन, स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को सदन के पटल पर रखा। इनमें भूमि दाखिल-खारिज प्रक्रिया में शुल्क लागू करने, दूसरे राज्यों के पंजीकृत चिकित्सकों और नर्सों को बिहार में कार्य करने की सुविधा देने तथा निजी विश्वविद्यालयों के संचालन से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख हैं। इन विधेयकों पर आगे सदन में चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।

दाखिल-खारिज के लिए प्रस्तावित होगा शुल्क
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से प्रस्तुत बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 के अनुसार, अब भूमि के दाखिल-खारिज से संबंधित प्रत्येक आवेदन पर 200 रुपये का शुल्क प्रस्तावित किया गया है। विभाग का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में न्यायालय शुल्क स्टांप का प्रावधान तो है, लेकिन सामान्य रैयतों से अलग से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। सरकार का मानना है कि राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था में बदलाव आवश्यक है।
दूसरे राज्यों के डॉक्टरों और नर्सों को मिलेगी सुविधा
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संशोधन प्रस्तावों के तहत दूसरे राज्यों में पहले से पंजीकृत डॉक्टर और नर्स अब स्व-प्रमाणन के आधार पर बिहार में कार्य कर सकेंगे। वर्तमान व्यवस्था में उन्हें पहले अपने मूल राज्य से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करना और फिर बिहार में नया पंजीकरण कराना पड़ता था। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य इस प्रक्रिया को सरल बनाना और स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाना है।
निजी विश्वविद्यालयों के लिए नई व्यवस्था
बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत निजी विश्वविद्यालयों को सीमित अवधि के लिए औपबंधिक संचालन की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि कोई प्रायोजक संस्था भवन, आधारभूत ढांचा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन देती है, तो उसे एक शैक्षणिक सत्र तक विश्वविद्यालय संचालित करने की अनुमति मिल सकेगी। हालांकि, निर्धारित अवधि में सभी आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होने पर यह अनुमति स्वतः समाप्त हो जाएगी।
यूजीसी मानकों के अनुरूप होगा संचालन
प्रस्तावित संशोधन में स्पष्ट किया गया है कि निजी विश्वविद्यालयों का संचालन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्धारित मानकों के अनुरूप होना अनिवार्य रहेगा। सरकार का उद्देश्य राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ गुणवत्ता और नियामकीय मानकों को भी सुनिश्चित करना है, ताकि छात्रों के हित सुरक्षित रह सकें।
मानसून सत्र के लिए अध्याशी सदस्यों का मनोनयन
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने मानसून सत्र के संचालन के लिए चार अध्याशी सदस्यों का मनोनयन किया है। इनमें राम नारायण मंडल, श्याम रजक, आलोक मेहता और ज्योति देवी शामिल हैं। वहीं, विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने डॉ. संजीव कुमार सिंह, प्रो. नवल किशोर यादव, मदन मोहन झा और महेश्वर सिंह को अध्याशी सदस्य नामित किया है। इन सदस्यों की जिम्मेदारी सदन की कार्यवाही के सुचारु संचालन में सहयोग देना होगी।